दिल्ली सरकार सुशासन की ओर बढ़ने का दावा कर रही है, लेकिन कड़कड़डूमा के सीबीडी ग्राउंड इलाके में अवैध बोरवेल का मामला इन दावों पर सवाल खड़ा कर रहा है। बैंक्वेट हॉल और होटलों में खुलेआम चल रही गतिविधियों ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है।
करीब डेढ़ दर्जन बैंक्वेट और आधा दर्जन होटलों में बिना अनुमति बोरवेल लगाए और संचालित किए जाने की चर्चा है। इनमें The Aurelia, Tayal Farm, Grand Veridian, The Messina, Grand Amara, Mezban, The Vivann, Auretae, Glorious, The Keyaan जैसे बड़े नाम शामिल बताए जाते हैं।
कार्रवाई की जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों पर होती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह आरोप है कि जांच और कार्रवाई अक्सर औपचारिकता तक सीमित रह जाती है। एसडीएम की टीमें मौके पर जाती हैं, निरीक्षण करती हैं और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
कड़कड़डूमा का मामला जल बोर्ड और SDM विश्वास नगर अमोद बर्थवाल तक पहुंचा और टीम ने निरीक्षण भी किया। हालांकि बाद में कार्रवाई की गति धीमी पड़ गई। सूत्रों का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में ‘सिस्टम सेट’ होने की चर्चा है, जिससे कई बार गंभीर आरोपों की जांच भी अधूरी रह जाती है।
सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि वह प्रधानमंत्री के विजन पर काम कर रही है, लेकिन जमीनी हालात को लेकर लोगों में सवाल और चर्चाएं बनी हुई हैं।
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