जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इन दस्तावेजों के जरिए आरोपियों की नियुक्ति, सेवा अवधि और MCD में उनके पद से संबंधित रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संबंधित कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया किस स्तर पर हुई थी।
सूत्रों ने दावा किया कि गिरफ्तार किए गए MCD के दो आरोपियों में से एक ने कथित तौर पर किसी दूसरे व्यक्ति के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर निगम में नौकरी हासिल की और लंबे समय तक उसी पहचान के आधार पर सेवा में बना रहा।
इस दावे ने MCD के केंद्रीय स्थापना विभाग (CED) की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच का एक अहम पहलू यह है कि यदि दस्तावेज फर्जी थे तो नियुक्ति से लेकर सेवा के दौरान अलग-अलग चरणों में उनका सत्यापन क्यों नहीं हुआ।
CED की भूमिका पर निगाह
सूत्रों के मुताबिक, CBI अब यह भी जांच रही है कि आरोपी के सेवा रिकॉर्ड की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी किन अधिकारियों की थी। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि कथित तौर पर गलत दस्तावेजों के आधार पर नौकरी जारी रहने के दौरान किसी अधिकारी ने आपत्ति दर्ज की थी या नहीं।
जांच एजेंसी द्वारा वेतन पर्ची और सर्विस फाइल को अपने कब्जे में लिया जाना इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इन रिकॉर्ड से आरोपी की नियुक्ति से लेकर वर्तमान सेवा स्थिति तक की कड़ियों को जोड़ा जा सकता है।
हालांकि, इन आरोपों और जांच के सभी पहलुओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। CBI की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कैसे हुआ और इसमें किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं।
जांच आगे बढ़ने के साथ MCD के CED से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच एजेंसी के रडार पर रहने की संभावना है।

