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“रद्द हो चुका प्रोजेक्ट फिर एजेंडे में क्यों? BJP की ‘बिल्डर वापसी’ पर सवाल!”

दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने पूर्व में पास अंडर हिल रोड प्रोजेक्ट को रद्द करने के पीछे की वजह भ्रष्टाचार बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिश्वत न मिलने को लेकर भाजपा के मेयर और स्टैंडिंग कमेटी अध्यक्ष के बीच सेटिंग नहीं हो पाई। इसलिए पहले से पास अंडर हिल रोड प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया। पिछली स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में जब भाजपा ने इसे पास कर दिया था तो फिर क्यों रद्द किया, क्या पैसे का बंदरबांट सही से नहीं हो पाया? आरोप लग रहे हैं कि इसमें पैसे का मोटा लेनदेन हुए है और सिविक सेंटर से लेकर भाजपा दिल्ली कार्यालय तक के लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जब प्राइवेट बिल्डर का प्रोजेक्ट पहले ही नॉर्थ एमसीडी के लेआउट प्लान में रद्द हो चुका है तो फिर भाजपा इसे दोबारा लेआउट प्लान में कैसे का सकती है? इस प्रोजेक्ट को भाजपा ने हमेशा के लिए नहीं रद्द किया है, बल्कि सेटिंग होते ही दोबारा प्रस्ताव लाएगी।

“आप” के वरिष्ठ नेता व एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर कहा कि गुरुवार को स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में एजेंडा पार्ट-सी में 2 ‘अंडर हिल रोड’ का लेआउट प्लान लाया गया। यह मामला सीधे-सीधे भाजपा शासित एमसीडी के भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग से जुड़ा है। क्योंकि 2 ‘अंडर हिल रोड’ एक बिल्डर की निजी प्रॉपर्टी है, जिसके लेआउट प्लान में कई गंभीर गड़बड़ियां हैं। पहली स्टैंडिंग कमेटी बैठक में भाजपा ने इसे एजेंडे में नहीं लिया। दूसरी बैठक में आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने प्रोजेक्ट का जोरदार विरोध किया। हमने कहा कि यह प्रॉपर्टी राजस्व विभाग में पंजीकृत नहीं है। खसरा नंबर गलत ट्रांसलेट किए गए हैं, जबकि वास्तविक खसरा नंबर 3-4 किमी दूर की जमीन का था। दस्तावेजों में इसे 5,400 गज का प्लॉट बताया गया, जबकि यह 11,800 गज का है। स्टैंडिंग कमेटी के “आप” पार्षद सदस्यों ने इस पर अपनी असहमति दर्ज की। फिर भी भाजपा ने 2 अंडर हिल रोड प्रोजेक्ट को स्थायी समिति में पास कर दिया।

नारंग ने बताया कि गुरुवार को ही स्टैंडिंग कमेटी में मिनट्स हमारे पास नहीं आए। मैंने निगम सचिव से लिखित में इसका कारण पूछा तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। बाद में पता चला कि मेयर और स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन के बीच 2 अंडर हिल रोड प्रोजेक्ट के बिल्डर के साथ समन्वय नहीं बन पाया और इस प्रोजेक्ट के प्रस्ताव को रिजेक्ट कर दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर सब कुछ ठीक था, तो पहले 2, अंडर हिल रोड प्रोजेक्ट को पास क्यों किया और अब रिजेक्ट क्यों किया?

एमसीडी नेता प्रतिपक्ष ने कोर्ट के दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि 2004 में शकुंतला गुप्ता ने ‘शकुंतला गुप्ता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ केस दायर किया और 16 अप्रैल 2009 को जीत गई। कोर्ट ने माना कि 5,400 वर्ग गज की प्रॉपर्टी उनकी है। अब यह प्रॉपर्टी बंट चुकी है। फिर एमसीडी 5,400 वर्ग गज का लेआउट प्लान कैसे पास कर सकती है? 2021 में नॉर्थ एमसीडी ने भी इस एजेंडे को रिजेक्ट किया था। कोर्ट के दस्तावेज भी इसकी पुष्टि करते हैं।

सवाल किया कि जब सीटीपी और एमसीडी को गलत खसरा नंबर, गैर-पंजीकृत प्रॉपर्टी, कोर्ट केस सहित सारी खामियां पता थीं, तो यह एजेंडा बार-बार क्यों लाया गया? क्या सीटीपी भ्रष्टाचार की मंशा से इसे लाया? क्या भाजपा और बिल्डर के बीच मिलीभगत थी? 20 अगस्त की स्टैंडिंग कमेटी में आम आदमी पार्टी ने आपत्ति उठाई, मिनट्स में दर्ज कराया। फिर भी भाजपा ने इसे पास कैसे कर दिया। ये आरोप लग रहे हैं कि 2, अंडर हिल रोड प्रोजेक्ट में मोटा लेन-देन हुआ। आरोप ये भी लग रहे की मेयर और स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन भी इसमें शामिल थे और जब ‘बंदरबांट’ सही नहीं हुई, तो इस प्रोजेक्ट को रिजेक्ट करना पड़ा।

अंकुश नारंग ने बताया कि गुरुवार की स्टैंडिंग कमेटी मीटिंग के दौरान मैंने पूछा कि क्या यह मुद्दा फिर लाएंगे? जवाब मिला कि ‘हो सकता है।’ यानी जब सेटिंग्स पूरी हो जाएंगी, तब फिर लाएंगे। भाजपा पर आरोप लग रहे हैं कि सिविक सेंटर से लेकर भाजपा के दिल्ली प्रदेश कार्यालय तक लोग इस। प्रोजेक्ट को पास करवाने में जुटे हैं। आरोप हैं कि यह कोई छोटा-मोटा लेन-देन नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार का मामला है।

भाजपा की चार इंजन वाली सरकार दिल्ली में कर्मचारियों के दुख नहीं देखती। सफाई कर्मचारियों को पक्का नहीं किया जा रहा। मलेरिया और डेंगू के बढ़ते मामलों पर कोई कदम नहीं उठाए जा रहे। लेकिन प्राइवेट बिल्डरों को फायदा देने के लिए (जैसे 2, अंडर हिल रोड या पहले उठाए गए एस्ट्रॉयड शेल्टर जैसे प्रोजेक्ट्स) भाजपा तुरंत तैयार हो जाती है। पिछले 15 सालों में भाजपा ने एमसीडी में भ्रष्टाचार की मिसाल कायम की है। क्या अब फिर वही रास्ता अपनाया जा रहा है? यह सिर्फ एक प्रॉपर्टी का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम में भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग का सवाल है। भाजपा नेता बताएं कि क्यों बार-बार गलत प्रोजेक्ट्स को पास करने की कोशिश हो रही है? क्यों बिल्डरों को फायदा पहुंचाया जा रहा है?

मैं इस पर निगम आयुक्त, विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो को अपनी तरफ से चिट्ठी लिख रहा हूं कि इसकी सीटीपी की इंक्वारी होनी चाहिए। और यह मुद्दा पहले ही 2021 की स्टैंडिंग कमेटी में ही रिजेक्ट कर दिया गया था तो फिर यह मुद्दा एजेंडा में कैसे दोबारा आया। इसकी पूरी तफ्तीश हो और इसमें जो भी लेन-देन के आरोप है उनकी भी पुरी तफ्तीश होनी चाहिए।

—–ख़बर यहीं तक—–

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