DelhiCivicAlerts
BREAKING NEWSDelhi AlertsMunicipal Corporation of Delhi (MCD)

धान मिल से छतरपुर तक… ओपन टेरेस पर नियमों की धज्जियां EXCLUSIVE

गोवा हादसे के बाद हमने ग्राउंड इवेस्टीगेशन में पाया कि राजधानी में रसूख के आगे सिस्टम बेबस है। दिल्ली में छतों पर अवैध बार चल रहे हैं जिन्हें हादसे का इंतजार है। दिल्ली के धान मिल, छतरपुर और केशव पुरम जैसे इलाकों में ओपन टेरेस पर बिना लाइसेंस रेस्टोरेंट और बार का संचालन राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। रसूखदार प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई करना डिप्टी हेल्थ ऑफिसर्स तक के लिए चुनौती बन गया है। भवन उपयोग में खुले उल्लंघन के बावजूद बिल्डिंग विभाग की निष्क्रियता और राजनीतिक-प्रशासनिक पहुंच ने हालात को और पेचीदा बना दिया है। जानकार कह रहे हैं कि अगर लाइसेंसिंग को केवल टैक्स भुगतान से जोड़ दिया गया तो दिल्ली बड़े पैमाने पर आग हादसों के खतरे में घिर सकती है।

आंकड़े के मुताबिक दिल्ली में 200 ओपन टैरेस रेस्टोरेंट हैं। 2000 बड़े रेस्टोरेंट (90 वर्ग मीटर से बड़े) फायर एनओसी व हेल्थ ट्रेड लाइसेंस के साथ संचालित हो रहे हैं।

दिल्ली के कई इलाकों जैसे धान मिल, छतरपुर और केशव पुरम में ओपन टेरेस पर बिना लाइसेंस रेस्टोरेंट और बार संचालित होने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्थिति यह है कि कई प्रतिष्ठानों की ताकत और रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनके खिलाफ कार्रवाई करने में डिप्टी हेल्थ ऑफिसर्स तक की पेशानी पर बल पड़ जाता है। बिल्डिंग के गलत उपयोग के साफ उल्लंघन के बावजूद बिल्डिंग विभाग अपने कदम पीछे खींच लेता है।

जानकार बताते हैं कि इन प्रतिष्ठानों की राजनीतिक और प्रशासनिक पहुंच उतनी ही मजबूत दिखाई देती है, जैसी गोवा के होटल मालिकों के मामलों में सामने आई थी, जहां IPS अधिकारियों पर भी मदद करने के आरोप लगे थे।

साउथ दिल्ली में बड़ी संख्या में बिना लाइसेंस रेस्टोरेंट और बार चल रहे हैं। हेल्थ विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के अनुसार लगभग 2000 रेस्टोरेंट और होटल यूनिट्स ऐसे हैं जिन्हें फायर NOC मिलने के बाद ही हेल्थ ट्रेड लाइसेंस जारी किया गया, लेकिन इसी व्यवस्था को नजरअंदाज करते हुए कई स्थानों पर ओपन टेरेस पर अवैध रूप से व्यवसाय जारी है।

  • रसूखों की बानगी के देखिए। हाल ही में कोटला मुबारकपुर स्थित एक लोकप्रिय खाद्य प्रतिष्ठान को फायर NOC नहीं होने के कारण नगर निगम ने सील किया था, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही उसे डी-सील कर दिया गया। यह मामला भी उच्चस्तरीय पहुंच और प्रभाव के चलते संभव हुआ ऐसा निगम के अधिकारी ने आरोप लगाया। एक प्रमुख पिज़्ज़ा चैन हाई कोर्ट के स्टे आदेश का सहारा लेकर सीलिंग कार्रवाई से बार-बार राहत ले लेता लेता है।

दिल्ली नगर निगम ने अब तक लगभग 200 ओपन टेरेस रेस्टोरेंट को आधिकारिक लाइसेंस जारी किए हैं, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध रूप से संचालित ऐसे प्रतिष्ठानों की संख्या 25 से 30 के बीच है। नियमों के अनुसार 90 वर्ग मीटर से बड़े रेस्टोरेंट के लिए फायर NOC अनिवार्य है, अन्यथा उन्हें सील किया जाता है। हेल्थ विभाग का डेटा स्पष्ट करता है कि लगभग 2000 यूनिट्स को लाइसेंस फायर सुरक्षा मानकों की जांच के बाद ही दिया गया।

चौंकाने वाली बात ये है कि रेस्टोरेंट को लाइसेंस देने के मामले में बजट प्रस्ताव करते हुए कमिश्नर अश्वनी कुमार ने पब्लिक हेल्थ विभाग के लाइसेंस को प्रॉपर्टी टैक्स के साथ क्लब करने का  प्रस्ताव दे दिया जिस पर विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि अगर केवल टैक्स भुगतान से लाइसेंस मिलना शुरू हो गया तो लाइसेंसिंग का उद्देश्य ही खत्म  हो जाएगा। फायर सुरक्षा मापदंडों की जांच, निरीक्षण और एनओसी की अनिवार्यता खत्म होने से राजधानी बड़े स्तर पर आग हादसों के खतरे में घिर सकती है। और गोवा अग्निकांड जैसे हादसे आए दिन होचते रहेंगे।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अब तक हेल्थ विभाग फायर सेफ्टी के सभी पहलुओं की जांच करने के बाद ही लाइसेंस जारी करता है। लेकिन प्रस्ताव लागू होने पर बिना सुरक्षा मानकों का पालन किए भी रेस्टोरेंट और बार संचालन की राह खुल जाएगी, जो दिल्लीवासियों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है।

—ख़बर यहीं तक

Related posts

विदेशी पर्यटक से मोबाइल चोरी का मामला 8 घंटे में सुलझा, नाबालिग आरोपी गिरफ्तार

delhicivicalerts

₹5 Lakh Ex-Gratia, Stronger Canal Safety: Delhi Govt’s Response to Tragedy

delhicivicalerts

बचपन में मां से सीखने वाली भाषा(हिंदी)सबसे बढ़िया, MCD कार्यालयों में हो इस्तेमाल

delhicivicalerts

Leave a Comment