दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण के खिलाफ बहु-स्तरीय लड़ाई में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। कल से राजधानी में “नो पीयूसी, नो फ्यूल” नियम लागू होगा। इसका मतलब है कि जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल या डीज़ल नहीं दिया जाएगा। साथ ही गैर-बीएस-6 बाहरी राज्यों के वाहनों की दिल्ली में एंट्री पर भी रोक रहेगी।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पेट्रोल पंप डीलर संघ और वरिष्ठ ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर इस अभियान की रूपरेखा साझा की। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार चार मोर्चों पर काम कर रही है—वाहन प्रदूषण, धूल, उद्योग और ठोस कचरा। “हमारा लक्ष्य हर दिल्लीवासी को साफ हवा देना है। यह कदम किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों और नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए है,” सिरसा ने कहा।
इस अभियान को सफल बनाने के लिए 126 चेकपॉइंट्स पर 580 पुलिसकर्मी और 37 प्रखर वैन तैनात की जाएंगी। परिवहन विभाग की टीमें पेट्रोल पंपों और बॉर्डर पर मौजूद रहेंगी। पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरे और वॉइस अलर्ट सिस्टम भी लगाए जाएंगे ताकि नियम का पालन सुनिश्चित हो सके।
सरकार ने तकनीकी मोर्चे पर भी कदम बढ़ाए हैं। गूगल मैप्स के साथ साझेदारी कर ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाने की योजना बनाई जा रही है। मंत्री ने बताया कि कम से कम 100 नए ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स की पहचान कर वहां समाधान लागू किया जाएगा।
धूल और कचरे से प्रदूषण रोकने के लिए पीडब्ल्यूडी ने गड्ढों की निगरानी की स्थायी व्यवस्था शुरू की है। थर्ड पार्टी एजेंसी 72 घंटे में मरम्मत सुनिश्चित करेगी और सालभर डेटा एकत्र कर ऑडिट करेगी।

इस बीच, त्रिलोकपुरी विधायक रविकांत के साथ मंत्री सिरसा ने एक गंभीर घटना का खुलासा किया। आरोप है कि आम आदमी पार्टी के एक पार्षद ने जानबूझकर कचरा जलाकर प्रदूषण बढ़ाने की कोशिश की। सिरसा ने विपक्षी नेताओं से अपील की कि ऐसी राजनीति से दूर रहें और प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करें।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने साफ संदेश दिया है—प्रदूषण के खिलाफ यह लड़ाई लंबी है, लेकिन सरकार और जनता मिलकर इसे जरूर जीतेंगे।
–ख़बर यहीं तक

