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लोक लेखा समिति सदन पटल पर सीएजी की चार रिपोर्ट की करेगी जांच

माननीय मुख्यमंत्री ने दिनांक 04 अगस्त 2025 को सदन पटल पर सीएजी की चार रिपोर्ट प्रस्तुत की थीं। Appropriation Accounts पर रिपोर्ट से पता चलता है कि वर्ष 2023-2024 के दौरान 15,327 करोड़ रुपये की राशि खर्च नहीं की गई, जिसमें से 8376.40 करोड़ रुपये surrender में देरी के कारण lapse हो गए। इस राशि का उपयोग जरूरी विकास कार्यों के लिए किया जा सकता था।

वर्ष 2023-2024 के Finance Accounts में C&AG ने पाया है कि सरकारी विभागों ने Abstract Contingent Bill जमा नहीं किए, जिस कारण 346.82 करोड़ रुपये की राशि बकाया थी। इसका अर्थ है कि यह confirm करने का कोई तरीका नहीं था कि विधानसभा के Authorization के अनुसार राशि वास्तव में खर्च की गई थी या नहीं। वर्ष 2022-2023 में यह राशि 574.89 करोड़ रुपये थी। C&AG ने 31 मार्च 2024 तक 3760.84 करोड़ रुपये की राशि के उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा न करने पर भी चिंता व्यक्त की है।


वर्ष 2023-24 के लिए State Finances पर रिपोर्ट के अध्ययन से पता चलता है कि वर्ष 2022-23 में Revenue Surplus 14457 करोड़ रुपये से घटकर 2023-24 में 6462 करोड़ रुपये हो गया। यदि केंद्र सरकार ने पेंशन देनदारियों और दिल्ली पुलिस पर 11,123 करोड़ रुपये का खर्च वहन नहीं किया होता तो यह राजस्व घाटे में बदल जाता। वर्ष 2019-2020 से वर्ष 2023-2024 के दौरान, capital expenditure लगातार capital budget से कम रहा है। राजकोषीय घाटा वर्ष 2019-20 में 416 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 3,934 करोड़ रुपये हो गया। भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड पर C&AG की रिपोर्ट में भी कई गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा किया है। तत्कालीन दिल्ली सरकार के पास Building and other Construction Workers की संख्या से संबंधित विश्वसनीय आंकड़े नहीं थे। 6.96 लाख पंजीकृत श्रमिकों में से, विभाग के पास केवल 1.98 लाख श्रमिकों का डेटाबेस था। डुप्लिकेट इमेज और multiple registration जैसे registration process में कई खामियां मिलीं। आश्चर्यजनक रूप से 1.19 लाख लाभार्थियों को 2.38 लाख image से जोड़ा गया।
राष्ट्रीय औसत 74% के मुकाबले केवल 7.3%. रजिस्ट्रेशन को ही renew किया गया। एकत्रित किए गए cess के रिकॉर्ड तथा जिला और बोर्ड के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के बीच 204.95 करोड़ रुपये का अंतर था। बोर्ड कुल एकत्रित cess में से केवल 9.53 से 11% के आसपास लाभ वितरित कर सका। श्रमिकों की सुविधा के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए और विभाग कोई भी social audit करने में विफल रहा।

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