दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके की मशहूर कतरन मार्केट में एमसीडी की बुलडोजर कार्रवाई ने हज़ारों कारोबारियों और स्थानीय लोगों में गुस्सा और निराशा भर दी। बिना पूर्व नोटिस की गई इस कार्रवाई ने रोज़ी-रोटी पर संकट खड़ा कर दिया और बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सोमवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में एमसीडी ने कथित अवैध अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की। बुलडोजर चलते ही कई दुकानों और अस्थायी ढांचों को तोड़ दिया गया। अचानक हुई कार्रवाई से बाजार में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में व्यापारी, महिलाएं और स्थानीय लोग मौके पर इकट्ठा होकर विरोध करने लगे।
कारोबारियों का आरोप है कि उन्हें किसी प्रकार का नोटिस नहीं दिया गया और अचानक बुलडोजर चलाकर उनकी आजीविका पर हमला किया गया। उनका कहना है कि यह मार्केट करीब 40 वर्षों से संचालित हो रही है और यहां 3 से 4 हजार दुकानें हैं, जिनसे लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।
महिलाओं ने पुलिस पर अभद्र व्यवहार और मारपीट के आरोप लगाए। कुछ ने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने धक्का-मुक्की की और थप्पड़ तक मारे। मार्केट के प्रधान ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान पुलिस अधिकारी भी मारपीट में शामिल थे।
स्थानीय निगम पार्षद ने भी कहा कि उन्हें कार्रवाई की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि लोगों के रोजगार और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई जारी रहेगी। कारोबारियों ने केंद्र सरकार के स्ट्रीट वेंडिंग कानून और टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें रोजगार का अधिकार प्राप्त है, लेकिन सरकार उन्हें सुविधाएं देने के बजाय लगातार परेशान कर रही है।
एमसीडी की ओर से इसे अवैध अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया बताया गया। कार्रवाई के बाद सड़क को खाली कराया गया और बुलडोजर वापस भेज दिया गया। हालांकि प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि दोबारा अतिक्रमण होने पर फिर कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल बाजार में तनाव और असुरक्षा का माहौल है। व्यापारी और स्थानीय लोग भविष्य को लेकर चिंतित हैं और सवाल कर रहे हैं कि क्या उनकी रोज़ी-रोटी सुरक्षित रह पाएगी।

