DelhiCivicAlerts
BREAKING NEWSRashtriya Swayamsewak Sangh ( RSS)

संघ शताब्दी वर्ष पर ‘शंखनाद-1’ का भव्य विमोचन

अखिल भारतीय साहित्य परिषद, गाज़ियाबाद इकाई के तत्वावधान में रविवार को ईस्ट दिल्ली पब्लिक स्कूल, प्रताप विहार में एक भव्य साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित हुआ, जिसमें मुख्य रूप से साझा काव्य संग्रह ‘शंखनाद-1’ पुस्तक का गरिमामयी विमोचन संपन्न हुआ।

पुस्तक का विमोचन मुख्य अतिथि और माननीय विभाग संघचालक कैलाश चन्द्र अग्रवाल जी के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ। अपने विचारणीय उद्बोधन में उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित जनसमूह और प्रबुद्ध वर्ग से आग्रह किया कि समाज का हर नागरिक सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, ‘स्व’ का बोध (आत्मगौरव) तथा नागरिक कर्तव्य बोध को अपने जीवन में पूरी निष्ठा के साथ अपनाए।

‘शंखनाद-1’ पुस्तक में देश के 51 प्रमुख रचनाकारों की रचनाएं संकलित हैं। विमोचन के उपरांत पुस्तक में प्रकाशित और कार्यक्रम में उपस्थित रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक कविताओं और छंदों का पाठ किया, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। काव्य-पाठ का विवरण बिना किसी बदलाव के निम्नवत है :

इन्द्रजीत सुकुमार (सरस्वती वन्दना) :

“नव गति नवलय नवल उन्मान दे माँ”

अचिरतोष मिश्र :

“शब्द ब्रहम है ब्रह्मनाद और नादश्वर मन भाव भरते।
शिव हृदय के नाद मिल पावन सृजन संगीत करते,”

संजीव शर्मा :

“युद्ध कभी भी हो सकता है, तैयारी रखनी पड़ती है,”

मोहन

“जितना मन भयभीत तुम्हारा, तम उतने बलहीन नहीं।
भीष्म प्रतिज्ञा करके केवल विवश हुए हो दीन नहीं”

विनोद शर्मा :

“कहने को हैं बात बहुत सी, कहना क्या वाजिब होगा?
रहना चुप क्या ठीक नहीं है, बन रहना हाजिब होगा।।”

इन्द्रजीत सुकुमार :

“अनगिनत सब कामनाएं, देश हित पर वार देना
मन मनुजता के लिए, चुपचाप सब कुछ हार देना।”

डॉ. जय शंकर शुक्ल :

“प्यार की सम्पति की, संसार में तुलना नहीं है,
जो ने आपा खो सके, कुछ भी उसे मिलना नहीं है।
द्वैत में अद्वैत सा पाता उसे कोई चितेरा-“

रजनी सिंह :

“राष्ट्र की प्रजा राष्ट्रहित एक होनी चाहिए एक होनी चाहिए और नेक होनी चाहिए
रंग-रूप भाषाए तो, भिन्न-भिन्न हो भले अनेकता में एकता की जीत होनी चाहिए।।”

दीपक गर्ग :

“अभी हमको मीलों चलना है।….
निज लक्ष्य को पाने हेतु, अभी हमको मीलों चलना है।
भूल न जायें ध्येय कहीं; सजग-पग आगे बढ़ना है।
निज लक्ष्य को पाने हेतु, अभी हमको मीलों चलना है।”

डॉ. जगदीश चन्द्र वर्मा (दर्पण की कहानी उसकी जुबानी) :

“लोग अपनी इच्छानुसार मेरे में चाहते है दिखना।
असम्भव है इसमें भाईयों वास्तविकता का छिपना ।।”

स्नेहलता भारती :

“भगवा झण्डा, भगवा वाणी
भगवा है परिधान हमारा, ऐसा हिन्दुस्तान हमारा”

सोनम यादव :

“जिनके पावन तट पर हर-हर बोला करते हैं
माँ गंगा के जल में क्यों विष को घोला करते हैं।”

निवेदिता शर्मा :

“कभी कभी फूलों से मिलना अच्छा लगता है
कभी. कभी तितली बन उड़ना अच्छा लगता है
मैं कब कहती हूँ कि मुझको पूरे के पूरा बग मिले
कभी-कभी नव फूल को चुनना अच्छा लगता है।”

विनोद कुमार वर्मा :

“राह तकते कटे दिन, जगे रात भर ऐसी रातें बिताने से क्या फायदा
ना ही मेरी सुनो, ना ही अपनी कहो बे वजह आने-जाने से क्या फायदा”

शान्तवना सिंह शुक्ला :

“मसला ये नहीं था तूने मुझे कैसे दगा दिया
बात ये है कि दिल तोड़कर तूने जता दिया।”

मनोज डागा राजस्थानी :

“पूरे जग को अपना कहते, हम सबको अपनाने वाले
हम त्याग धर्म के पोषक है हम क्षमादान करने वाले।”

नरेन्द्र वर्मा मस्ताना :

“गर सलीके से यहाँ, महफिल सजायी जायेगी
देखना मिट्टी से भी, चन्दन की खुशबू आएगी
बस रहो इंसान बनकर, बाकी उस पर छोड़िए
हर किसी की जिन्दगी फिर फूल सी मुस्कायेगी।।”

बाबा कानपुरी :

“सनातनी मर्यादा की मर्यादा रहे-
प्राची से अब तक का यश आबाद रहे
सकल विश्व में हो स्वदेश का पहले सा सत्कार”

सतीश दीक्षित (नोएडा):

“हर बार चुनावों में वादों के मेले लगते देखे हैं
बाजारों में हड़तालों के ठेले लगते देखे हैं”

डॉ. अटल मुरादाबादी :

“भूमि बंजर में सुमन, मैं खिलाना चाहता हूँ
और उनकी गंध मधुरिम, मैं बसाना चाहता हूँ।”

डॉ. चेतन आनंद:

“आज के काम कल पर न टाला करें,
इन अंधेरों में जाकर उजाला करें”

चन्द्र भानु मिश्र :

“लगेंगे कैसे दुख से पार, मिटेंगे कैसे कष्ट अपार
सौ वर्षों से यह प्रयास है, होंगे एक परिवार
संघ का यह ही सुघड़ विचार”

राष्ट्रभक्ति, सामाजिक चेतना, दर्शन और मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत इस सुंदर काव्य पाठ के साथ ही यह भव्य साहित्यिक गोष्ठी अपनी सम्पूर्णता और सफलता को प्राप्त हुई।

Related posts

कूड़े के पहाड़ पर पहुंचे नए एमसीडी कमिश्नर, बुला ली मीटिंग

delhicivicalerts

Vande Mataram is the soul of India, a song that unites 140 crore hearts in one voice of pride and devotion”– Vijendra Gupta

delhicivicalerts

सब्ज़ी मंडी इमारत हादसा- पुलिस ने बचाईं 22 जिंदगियां

delhicivicalerts

Leave a Comment