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दिल्ली में पिटबुल का कहर: मासूम का कान चबा गया

सीसीटीवी में ऐसे मंज़र क़ैद हुआ जिसने इलाके को लोगों को डरा दिया वहीं 6 साल के मासूम में जीवन भर के लिए एक बड़ा जख्म दे गया। दिल्ली के प्रेम नगर इलाके में एक ’पिटबुल कुत्ते’ ने छह वर्षीय मासूम बच्चे पर अचानक हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया।

सीसीटीवी फुटेज बताता है पूरा सच’

जानकारी के अनुसार, एक महिला अपने घर से पिटबुल कुत्ते को लेकर बाहर निकलती है। कुछ ही सेकंड में कुत्ता उसके नियंत्रण से छूटकर सड़क के दूसरी ओर खड़े छह साल के बच्चे पर टूट पड़ता है। डर के मारे बच्चा भागने लगता है, मगर पिटबुल पीछा करते हुए उसे पकड़ लेता है और हमला शुरू कर देता है। महिला कुत्ते को बच्चे से छुड़ाने की कोशिश करती है, लेकिन नाकाम रहती है। फिर एक युवक बच्चे की टांग पकड़ कर उसे खींचकर मुश्किल से कुत्ते से अलग करता है। बताया गया है कि हमले के दौरान पिटबुल ने बच्चे के ’कान को जबड़े में दबा लिया था’, और छुड़ाने की कोशिश में ’कान टूटकर सड़क पर गिर गया’। सीसीटीवी फुटेज में यह भी दिखाई देता है कि कुछ सेकंड बाद कोई व्यक्ति हमले की जगह से कुछ उठा कर ले जाता है : संभावना है कि वह बच्चे का कान रहा होगा।

एमसीडी ने खुंखार नस्ल के कुत्तों जैसे पिटबुल, रॉटवीलर जैसी नस्लों पर रोक लगाने की बात कही थी, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं दिखती। ’पेट डॉग लाइसेंस अनिवार्य की बात क्या वास्तव में लागू है?’ दिल्ली में अधिकांश पालतू कुत्ते बिना लाइसेंस के हैं। घरों में खतरनाक नस्लें पाली जा रही हैं, लेकिन निगम का कोई निरीक्षण या सख्ती नहीं।

ये घटना दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम के उन दावों की पोल खोलती है, जिनमें कहा जाता है कि खतरनाक नस्लों पर सख्त नियंत्रण, पेट लाइसेंसिंग की अनिवार्यता और नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था मौजूद है। असलियत यह है कि राजधानी में पालतू पिटबुल और कई खतरनाक नस्ल के कुत्ते खुलेआम पाले जा रहे हैं। प्रशासन केवल कागज़ों पर ही सक्रिय है। ऐसे कुत्तों के लिए मज़बूत लीश, मज़ल और सार्वजनिक स्थानों पर अतिरिक्त नियंत्रण अनिवार्य है परंतु इसकी निगरानी कौन कर रहा है?

पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने प्रेमनगर में छह वर्षीय बच्चे का कान काटने वाली कुत्ते की घटना पर एक बार फिर कुत्ता-प्रेमियों को कटघरे में खड़ा किया।

विजय गोयल ने कहा कि लगातार ऐसी घटनाएँ सामने आ रही हैं, जिनमें आम जनता नगर निगम और सरकार से आवारा कुत्तों की शिकायत करती रहती है, लेकिन कुत्तों को खाना खिलाने वालों के दबाव के कारण सरकार कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती।

गोयल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राज्य सरकारों के माध्यम से जिस किसी को भी कुत्ता काटे, उसे उचित मुआवजा मिले।

उन्होंने चिंता जताई कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद लोग सड़कों पर आवारा कुत्तों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं और उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई नहीं हो रही।

गोयल ने कहा कि आज मानव जीवन इतना असुरक्षित होता जा रहा है कि लोग घरों में कैद हो रहे हैं, जबकि कुत्ते सड़कों पर खुलेआम घूम रहे हैं।

यह स्थिति बेहद गंभीर है और यह स्पष्ट होना चाहिए कि आवारा कुत्तों की जिम्मेदारी आख़िर है किसकी—सरकार को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

—ख़बर यहीं तक

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