चाणक्य की नीति आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी सदियों पहले थी। उन्होंने कहा था—जब आप खुद को इतना काबिल बना लेते हैं कि शत्रु आपकी बराबरी करने की हिम्मत ही न कर पाए, तो उसकी सबसे बड़ी हार वहीं तय हो जाती है।
सफलता का असली कवच है आत्मबल। अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें ताकत में बदलना ही वह कला है जो आपको अजेय बना देती है।
कमज़ोरी को मिटाना ही असली विजय है, क्योंकि जब आत्मविश्वास ढाल बन जाए, तो कोई दुश्मन आपको कभी हरा नहीं सकता।

