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दिल्ली विधानसभा परिसर में नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा) का पहला चरण पूरा

विधायी कार्यों के डिजिटलीकरण और पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में दिल्ली विधानसभा ने पहला चरण पूरा कर लिया है। सोमवार को अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सेवा केंद्र का उद्घाटन किया और नेवा के पहले चरण की सफलता को रेखांकित किया।

गुप्ता ने कहा कि,“नेवा सेवा केंद्र का उद्घाटन और नेवा के पहले चरण की सफलता एक डिजिटल और पारदर्शी विधायिका की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह पहल प्रधानमंत्री जी के ‘डिजिटल इंडिया’, काग़ज़ रहित शासन और ‘वन नेशन, वन एप्लिकेशन’ के विज़न के अनुरूप है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछली सरकारों ने इस दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किया। नेवा के माध्यम से अब हम उस कमी को पूरा कर रहे हैं और एक उत्तरदायी एवं आधुनिक विधायी व्यवस्था की ओर अग्रसर हैं।”

पहले बैच के विधायकों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए एप्लिकेशन की कार्यप्रणाली में गहरी रुचि दिखाई। प्रत्येक सदस्य को नेवा एप्लिकेशन से युक्त स्मार्टफोन प्रदान किया गया, जिससे वे कार्यसूची, प्रश्न, दस्तावेज़ और सत्र संबंधी जानकारी तक आसानी से पहुँच सकें। सदस्यों ने इस पहल की सराहना की और इसे विधायी कार्यों की दक्षता में सुधार हेतु एक उपयोगी कदम बताया।

21 जुलाई से 23 जुलाई 2025 तक आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विधायकों को नेवा प्लेटफ़ॉर्म के उपकरणों और कार्यप्रणाली की व्यावहारिक जानकारी देना है, ताकि आगामी मानसून सत्र में वे प्रभावी रूप से भाग ले सकें और काग़ज़ रहित प्रणाली में सुगम रूप से रूपांतरित हो सकें।

संसदीय कार्य मंत्रालय (MoPA) से आए विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने विधायकों के पहले बैच के लिए व्यावहारिक और विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया। यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण छह बैचों में क्रमबद्ध रूप से आयोजित किया जा रहा है,जिससे प्रत्येक सदस्य को व्यक्तिगत और केंद्रित प्रशिक्षण सुनिश्चित हो सके।

डिजिटल परिवर्तन को सशक्त करने के लिए, नव स्थापित नेवा सेवा केंद्र में 18 हाई-स्पीड कंप्यूटर लगाए गए हैं, जो निरंतर प्रशिक्षण और डिजिटल परिचय हेतु बेहतर सुविधा प्रदान करते हैं।

यह पहल दिल्ली विधानसभा की आधुनिक, उत्तरदायी और नागरिक केंद्रित विधायी परंपराओं को अपनाने की सक्रिय सोच को दर्शाती है। जैसे-जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे बढ़ेगा, और अधिक विधायकों को डिजिटल रूप से सशक्त किया जाएगा, जिससे विधायी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता एवं प्रभावशीलता और भी अधिक बढ़ेगी।

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