कांग्रेस का यह आरोप भाजपा की निगम सरकार पर सीधा हमला है, जिसमें सफाई व्यवस्था से लेकर निर्माण कार्य तक भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया गया है। यह बयान राजधानी में स्वच्छता और विकास परियोजनाओं की धीमी रफ्तार पर भी सवाल उठाता है।दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को “भ्रष्टाचार की काली कमाई का अड्डा” करार देते हुए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा की “जीरो टॉलरेंस” नीति केवल बयानबाज़ी तक सीमित है, जबकि निगम में उच्च अधिकारियों से लेकर छोटे कर्मचारियों तक रिश्वतखोरी और अनियमित भुगतान का जाल फैला हुआ है।
मुख्य आरोप और घटनाएँ
- गिरफ्तारियाँ:
- मार्च 2026 — शाहदरा उत्तरी ज़ोन के उपायुक्त अभिषेक कुमार मिश्रा और प्रशासनिक अधिकारी देवांशु गौतम 4 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए सीबीआई द्वारा गिरफ्तार।
- 4 अप्रैल 2026 — जे.ई. और बेलदार घर गिराने से रोकने के लिए 80 हजार की मांग पर गिरफ्तार।
- दिसम्बर–जनवरी 2026 — नजफगढ़ ज़ोन में सहायक इंजीनियरों और कर्मचारियों को निर्माण अनुमति के लिए भारी रिश्वत मांगने पर गिरफ्तार किया गया।
- वेतन घोटाला: 2025 के अंत में संविदा आधारित सहायक स्वास्थ्य निरीक्षकों को दोहरा वेतन देने से जुड़ा 17 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर।
- भवन विभाग और लाइसेंसिंग: फाइलें जानबूझकर रोकी जाती हैं, जिससे रिश्वतखोरी और जबरन वसूली को बढ़ावा मिलता है।
- माफिया संस्कृति: लैंटर माफिया, पार्किंग माफिया, सफाई व्यवस्था में कर्मचारियों की नियुक्ति का खेल, सीलिंग और डी-सीलिंग प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार।
देवेंद्र यादव का बयान
“भ्रष्टाचार एमसीडी की संस्कृति बन चुका है। भाजपा के निगम पार्षद हर स्तर पर माफिया की तरह काम कर रहे हैं। पिछले 15 वर्षों में निगम में भ्रष्टाचार का खेल लगातार चला है और आम आदमी पार्टी ने भी भाजपा को मौका देकर इस खेल को जारी रखा है। दिल्ली की गंदगी, टूटी गलियां, भरी नालियां और बढ़ते लैंडफिल इसके जीते-जागते सबूत हैं।”
—ख़बर यहीं तक
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