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दिल्ली में मेयर पद की दौड़ तेज़, बीजेपी पार्षदों में बढ़ी प्रतिस्पर्धा

मेयर पद की यह रेस भाजपा के भीतर शक्ति संतुलन और गुटबाज़ी को उजागर करती है। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और पार्षदों की रणनीति पर निर्भर करेगा।

दिल्ली नगर निगम (MCD) में मेयर चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। पार्षदों की संख्या के आधार पर यह लगभग तय माना जा रहा है कि मेयर पद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हिस्से में जाएगा। इसी कारण पार्टी के भीतर दावेदारी को लेकर खींचतान और प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।

सूत्रों के अनुसार, वर्तमान मेयर राजा इकबाल सिंह, नेता सदन प्रवेश वाही, डेम्स कमेटी के चेयरमैन संदीप कपूर और स्टैंडिंग कमेटी की चेयरपर्सन सत्या शर्मा प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। इसके अलावा शिक्षा समिति के चेयरमैन एडवोकेट योगेश वर्मा और डिप्टी मेयर जय भगवान यादव भी इस दौड़ में अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।

किसको-किसका समर्थन

राजा इकबाल सिंह को प्रदेश अध्यक्ष विरेंद्र सचदेवा का समर्थन

  • प्रवेश वाही को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का समर्थित उम्मीदवार माना जा रहा है।
  • संदीप कपूर के साथ केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा का नाम जोड़ा जा रहा है।
  • सत्या शर्मा का पता नह
  • योगेश वर्मा और जय भगवान यादव अपने संघ नेटवर्क के जरिए समर्थन जुटाने की कोशिश में हैं।

दिल्ली नगर निगम (MCD) ने घोषणा की है कि मेयर, डिप्टी मेयर और स्थायी समिति के तीन सदस्यों के चुनाव 29 अप्रैल दोपहर 2 बजे निगम केंद्र में आयोजित किए जाएंगे। यह चुनाव निगम की नियमित अप्रैल बैठक के दौरान होगा और इसे दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 तथा संबंधित नियमों के अनुसार संपन्न किया जाएगा।

मुख्य तिथियाँ और नियम

  • नामांकन की अंतिम तिथि: 23 अप्रैल, शाम 5 बजे
  • शर्तें: उम्मीदवार को निर्धारित प्रपत्र भरकर हस्ताक्षर करना होगा, साथ ही दो निगम सदस्य प्रस्तावक और अनुमोदक के रूप में हस्ताक्षर करेंगे।

मेयर पद का रोटेशन नियम मेयर का पद पाँच वर्षीय चक्र में आरक्षित होता है—पहला वर्ष महिलाओं के लिए, फिर सामान्य, आरक्षित और दो सामान्य श्रेणी के कार्यकाल। इस वर्ष का चुनाव वर्तमान चक्र का पाँचवाँ और अंतिम कार्यकाल है।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

  • पहले तीन कार्यकालों में आप पार्षदों ने मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पदों पर कब्जा किया।
  • चौथे कार्यकाल में, भाजपा पार्षद राजा इकबाल सिंह (मुखर्जी नगर) मेयर बने, जब आप ने चुनाव का बहिष्कार किया। इससे भाजपा दो साल बाद निगम में सत्ता में लौटी।

यह चुनाव न केवल मौजूदा चक्र का समापन करेगा बल्कि दिल्ली की नगर राजनीति में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। हालांकि बीजेपी का बहुमत है।

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