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Motivation & Personality Development

अपनी कमज़ोरियों का बटन किसी और के हाथ में ना दें!!

1. जो टूटन आपको मिली, वह आपकी बनावट नहीं थी

तुम्हारे अंदर गुस्सा बहुत है। तुम शक़ करते हो। तुम बहुत डरते हो ऐसे बोलकर अक्सर लंबे समय तक आपको छोटा महसूस कराया जाता है तो धीरे-धीरे उसकी आवाज़ आपकी अपनी आवाज़ बन जाती है। “मैं ही ज़्यादा सोचता हूँ”, “शायद मुझमें ही कमी है”, ये वाक्य पहले उसने कहे थे, फिर आप खुद से कहने लगे। फिर यकीन भी करने लगे। इस सफ़र का पहला काम है यह पहचानना कि कौन-सी आवाज़ आपकी है और कौन-सी उधार की? समझे!

2. ताक़त का भ्रम

पुरानी कहावत है कि खुद़ की कमज़ोरी की चर्चा किसी से नहीं करनी चाहिए। यकीन मानिये हम मान लेते हैं कि जो हमें दबा सके, वह हमसे मज़बूत है। असल में दबाव अक्सर ताक़त से नहीं, जानकारी से चलता है। जो आपको दबा रहा है उसे पता है कि आपको किस बात पर डर लगता है, अपराध बोध होता है जिस दिन आपने अपनी कमजोरियों के ये बटन खुद पहचान लिए  उस दिन जबाव की पकड़ ढीली पड़ने लगती है।

3. सहना और समझदारी एक चीज़ नहीं हैं

अक्सर ऑफिस में लोग देर की शिफ्ट करने के लिए हां कर देते हैं क्योंकि ना नहीं हो पा रहा। इसकी वजह चाहे जो हो लेकिन  

सहनशीलता तब तक गुण है जब आप खुद चुनते हों। जो सहना आपको रोज़ डराए, तवान दे, परेशान करे, वह गुण नहीं, आदत है। खुद से पूछिए: “मैं देर की शिफ्ट इसलिए सह रहा हूँ क्योंकि यह मेरा चुनाव है, या इसलिए नहीं कि मना करने से डरता हूँ?”

4. चुप्पी के दो चेहरे

हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं। चुप रहना ही ठीक है। हालांकि एक चुप्पी भागने की होती है, जिसमें भीतर तूफ़ान चलता रहता है। दूसरी चुप्पी ठहराव की होती है, जिसमें आप जवाब देना छोड़ते नहीं, बस जल्दबाज़ी में देना छोड़ते हैं। पहली आपको थकाती है, दूसरी आपको धार देती है। फ़र्क़ पहचानने का तरीका सीधा है: बात करने के बाद आप हल्के हुए या भारी?

5. सीमा दीवार नहीं, दरवाज़ा है

कहते हैं हर किसी के लिए घर का दरवाजा नहीं खोलना चाहिए यानि सीमा तय करना बहुत जरूरी है। सीमाएँ तय करने का मतलब दुनिया से कट जाना नहीं है। दरवाज़ा बंद नहीं होता, बस आप तय करते हैं कि कौन, कब और किस हाल में भीतर आएगा। जो इसे अपमान समझे, वह शायद कभी मेहमान था ही नहीं।

6. एक चेतावनी: कठोर मत बन जाइए

चोट खाने के बाद सबसे आसान रास्ता है पत्थर बन जाना। पर जो हर किसी से डरकर दरवाज़े बंद कर ले, वह भी अपने पुराने घाव का ही बंदी है। सच्ची मज़बूती वह है जिसमें आप फिर भरोसा कर सकें, बस अब आँखें खोलकर।

7. उपचार सीधी रेखा नहीं है

कुछ दिन आप बहुत मज़बूत महसूस करेंगे और किसी दिन पुरानी याद फिर रुला देगी। इसका मतलब यह नहीं कि आप हार गए। मौसम की तरह मन भी लौटता है, पर हर बार पहले से कम समय के लिए।

8. जीत का नया पैमाना

जीत यह नहीं कि सामने वाला पछताए या उसे आपकी तरक्की दिखे। जीत यह है कि आपको उसकी प्रतिक्रिया की ज़रूरत ही न रहे। जिस दिन आप सुबह उठें और उसका ख़याल तक न आए, उस दिन समझिए आपका घर अपनी नींव पर खड़ा है।

ये अभ्यास करिए

एक पन्ने पर लिखिए: बाद में पन्ने को फाड़ दें

– एक बात जो मैं अब नहीं सहूँगा।

– एक बात जो मैं खुद को माफ़ करता हूँ।

– एक छोटा क़दम जो मैं इस हफ़्ते अपने लिए उठाऊँगा।

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