अजय अक्सर गुस्से में जल्दी प्रतिक्रिया दे देता था। जब भी कोई उस पर आक्रमण करता, वह पलटकर जवाब देने की कोशिश करता और बाद में पछताता। एक दिन उसके गुरु ने कहा— “जब कोई तुम्हें उकसाए, तो उसे बोलने दो। तुम शांत रहो और घटना को भूल जाओ। यही असली जीत है।”
अजय ने यह बात दिल से मान ली। उसने अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए एक नई आदत अपनाई—25% तेज़ चलना। कंधे सीधा, सिर ऊँचा और कदम मज़बूत। हर बार जब वह इस तरह चलता, उसे लगता कि डर पीछे छूट गया और आत्मविश्वास आगे बढ़ गया।
धीरे-धीरे उसने बोलने की आदत भी डाल ली—कभी सवाल पूछता, कभी सुझाव देता। उसकी झिझक टूट गई और लोग उसे ध्यान से सुनने लगे।
सभी तरह के सैकड़ों लोगों के इंटरव्यू के बाद मैने यही खोज की है– जो आदमी जितना बड़ा होता है, वह आपको बोलने का उतना ही ज्यादा मौका देता है। जो आदमी जितना छोटा होता है, वह आपके सामने उतना ही ज्यादा बोलता है। बड़े लोग लगातार सुनते हैं। छोटे लोग लगातार बोलते हैं। आपके कान आपके दिमाग के वॉल्व हैं। वे आपके दिमाग में कच्चा माल डालते हैं जिसे आप रचनात्मक उर्जा में बदल सकते हैं। हम बोलने से कुछ नया नहीं सीखते हैं।
परंतु हम पूछने और सुनने से बुहत कुछ नया सीख सकते हैं। केवल कुछ ही विचारों के फल मिलते हैं। विचार बहुत ही जल्दी नष्ट होने वाले बीज हैं। अगर हम विचारों की रखवाली ना करें तो नकारात्मक रूप से सोचने वाले लोग हमारे ज्यादातर विचारों को नष्ट कर देंगे। विचार जब पैदा होते हैं तो उनकी देखभाल करनी होती है जबतक कि वो बड़े ना हो जाएं और उनमें फल ना लगे।

