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दिल्ली एमसीडी में वेतन का संकट, कर्मचारी पूछ रहे—कब मिलेगा न्याय?

दिल्ली नगर निगम के जन स्वास्थ्य विभाग में मलेरिया कर्मचारियों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। 12 ज़ोन में से 6 ज़ोन में एमटीएस कर्मचारियों को पिछले दो महीने से तनख्वाह नहीं मिली है। छोटी सी सैलरी पर गुज़ारा करने वाले ये कर्मचारी अब बच्चों की स्कूल फीस, किराया और रोज़मर्रा का खर्चा तक नहीं उठा पा रहे। केशव पुरम, ग्रीन पार्क और शाहदरा नॉर्थ ज़ोन में तो अधिकारियों ने तनख्वाह काट भी दी है। सवाल यह है कि जब निगम ने खुद कमेटी बनाकर समाधान का वादा किया था, तो फिर कर्मचारियों को इस आर्थिक संकट में क्यों धकेला जा रहा है?

33 दिन लंबी हड़ताल के बाद बनी कमेटी का फैसला आज तक लागू नहीं हुआ। यूनियन का आरोप है कि सदन नेता प्रवेश वाही की अध्यक्षता में पक्ष-विपक्ष और अधिकारियों की मौजूदगी में तय हुआ समझौता सिर्फ कागज़ों में रह गया। हाउस में एक महीने में रिपोर्ट लाने का वादा भी अधूरा है। अब कर्मचारी पूछ रहे हैं—क्या निगम की नीतियां सिर्फ वादों और धोखे तक सीमित रह गई हैं?

मलेरिया कर्मचारियों पर निगम की मार, 2 महीने से तनख्वाह नहीं

दिल्ली नगर निगम के जन स्वास्थ्य विभाग में एमटीएस कर्मचारियों पर निगम का सितम कम होने का नाम नहीं ले रहा। निगम के 12 ज़ोन में से 6 जोन में 2 महीने से तनख्वाह ही नहीं मिल रही है। कर्मचारी परेशान हैं। केशव पुरम, ग्रीन पार्क और शाहदरा नॉर्थ ज़ोन के अधिकारियों ने तनख्वाह भी काट दी। अभी 6 जोन का पता ही नहीं की सैलरी किस तरह से दी जाएगी? क्योंकि, अभी 2 महीने से उनके खातों में सैलरी ही नहीं।

छोटी सी तनख्वाह और दो महीने से तनख्वाह नहीं तो कर्मचारी किस तरह से अपने खाने-पीने और बच्चों के स्कूल की फीस भरने और किराया देने की हालत बद से बदतर होती जा रही है।

तनख्वाह काट कर दी जा रही हैं वह भी वादा पूरा नहीं?

 एंटी मलेरिया एकता कर्मचारी यूनियन (रजीo) के देवानंद शर्मा ने बताया कि यूनियन मिलने के लिए  अधिकारियो से कई बार समय की मांग करने के बावजूद भी समय नहीं दिया जा रहा है। छोटे से लेकर बड़े अधिकारियों तक समय की मांग की गई लेकिन किसी भी अधिकारी ने समय नहीं दिया। फिर कर्मचारियों को दोषी कहा जाता है। कर्मचारी करें तो क्या करें? वादे कोई भी पूरे नहीं हुए। एक महीने में रिपोर्ट देने के लिए हाउस में लाने का वादा था वह भी पूरा नहीं ।

असल समस्या की जड़ ये

दरअसल, जन स्वास्थ्य विभाग में एमटीएस कर्मचारियों ने 29 सितंबर 2025 से 31 अक्टूबर 2025 तक हड़ताल की। एक समान वेतन और सैलरी के मुद्दे पर लगातार 33 दिन हड़ताल खत्म हो गई लेकिन आरोप है कि उस वक्त कमेटी का फैसला अब तक लागू नही हुआ। यूनियन का कहना है कि फैसले को सभी ने मान्यता दी और यूनियन में भी उसे स्वीकार किया। तब कमेटी की अध्यक्षता सदन नेता सदन  प्रवेश वाही ने की और  फैसले को पक्ष – विपक्ष, प्रशासनिक अधिकारी और यूनियन पदाधिकारी सभी ने गठित कमेटी में फैसला किया गया था। हैरानी की बात तो ये है कि कमेटी के फैसले को एक महीने में लागू करने के लिए हाउस में प्रस्ताव लाने की बात कही गई लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 13 दिसंबर को स्टैंडिंग कमिटी में ऐसे किसी प्रस्ताव की जानकारी यूनियन को नहीं है।

—ख़बर यहीं तक

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