मुस्कुराहट छोटी नहीं, बड़ी होनी चाहिए—इतनी कि दाँत दिखने लगें। यही मुस्कान सफलता की गारंटी है। ज़्यादातर लोग केवल शोर मचाते हैं, पर वास्तव में बहुत कम लोग नुकसान पहुँचाते हैं।
अपने करियर में मैंने यही सीखा कि जो चीज़ अवसर जैसी दिखे, उसे कभी ठुकराना नहीं चाहिए। छोटे लोगों को बड़े महत्व देना लाभकारी है, और बड़े लोगों को और बड़ा मानना भी फायदेमंद साबित होता है। तारीफ़ करने और नाम लेकर संबोधित करने की आदत डालें। जैसे पैसे का निवेश लाभ देता है, वैसे ही तारीफ़ का निवेश भी फायदा पहुँचाता है।
वर्तमान पर अटकने के बजाय भविष्य की संभावनाओं पर ध्यान दें। कल्पना शक्ति हर चीज़ को और कीमती बना देती है। बड़ा चिंतक हमेशा सोच लेता है कि आगे क्या किया जा सकता है। उसके लिए “क्या नहीं है” महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि “क्या होगा” ही असली मायने रखता है।
रचनात्मक रूप से खुद की आलोचना करें। अपनी कमजोरियों को स्वीकार करने में ना हिचकिचाएं। सच्चे प्रोफेशनल बनें। वे अपनी गलतियों और कमजोरियों को ढूंढते हैं और उन्हें दूर करते हैं। इसी कारण वे सफल प्रोफेसनल बनते हैं। हमें कम से कम 10 साल बाद तक की योजना बना लेनी चाहिए। आपको सबसे पहले तो अभी वह इमेज सोच लेना चाहिए। बिना लक्ष्यों के हमारा विकास नहीं होता।

