@RubySingh3t
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) पिछले कई वर्षों से लगातार फ्लैटों का निर्माण कर रहा है। लेकिन खराब लोकेशन, घटिया निर्माण गुणवत्ता, अत्यधिक कीमत और पुराने डिज़ाइन के कारण हजारों फ्लैट खाली पड़े हैं। इन फ्लैटों को बेचने के लिए डीडीए को बार-बार छूट योजनाएं लानी पड़ती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्माण मुख्य रूप से डीडीए की गतिविधियों को व्यस्त दिखाने और मुनाफा कमाने की कोशिश है। इसी स्वार्थपूर्ण नीति के चलते लैंड पूलिंग पॉलिसी जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं और अन्य नियोजित विकास कार्य पीछे छूट गए हैं।
इसी बीच, दिल्ली के कई हिस्सों में कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग और अनधिकृत कॉलोनियों का निर्माण तेजी से हो रहा है। बिना किसी नियम-कायदे के बन रही ये बस्तियां भविष्य में सत्य निकेतन, सैदुलाजाब और साकेत जैसी त्रासदियों को जन्म दे सकती हैं।
शहरी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर डीडीए फ्लैट निर्माण पर ही ध्यान देने के बजाय पीजी आवास, छात्र हॉस्टल और अन्य जन-सुविधाओं के विकास पर ध्यान देता, तो मासूम छात्रों और नागरिकों की जान लेने वाली घटनाओं से बचा जा सकता था। लैंड पूलिंग जैसी नीतियों को लागू करने में देरी इस संकट का एक बड़ा कारण है।

