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ट्यूलिप की रंगीन छटा सिर्फ लुटियंस दिल्ली तक ही नहीं, पलाश महोत्सव में हुआ विस्तार


दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने आज बांसेरा, बिरसा मुंडा चौक पर डीडीए के वार्षिक पलाश महोत्सव 2026 का उद्घाटन किया। इस बार महोत्सव पहली बार चार स्थानों—बांसेरा, अशोका गार्डन, लाला हरदयाल पार्क और स्मृति वन—पर एक साथ आयोजित हो रहा है।

14 से 16 फरवरी तक चलने वाले इस आयोजन ने राजधानी के नागरिकों को प्रकृति, सततता और सामुदायिक जीवन के साथ जोड़ने का एक अनूठा अवसर दिया है।

महोत्सव की विशेषताएँ

  • फूलों की प्रदर्शनी और थीम आधारित सजावट: हर स्थल को अलग थीम के अनुसार सजाया गया है, जिसमें प्रकृति, पर्यावरण और सामुदायिक जीवन का संदेश निहित है।
  • सांस्कृतिक और मनोरंजन गतिविधियाँ: आगंतुकों के लिए कारीगरों के स्टॉल, फ़ूड कोर्ट, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, कार्यशालाएँ और प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं।
  • ट्यूलिप का विस्तार: उपराज्यपाल की पहल पर ट्यूलिप को पहली बार पलाश महोत्सव का हिस्सा बनाया गया है। पहले लुटियंस ज़ोन तक सीमित ट्यूलिप अब दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में खिलते हुए शहरी सुंदरता और जन भागीदारी का प्रतीक बने हैं।
  • पर्यावरणीय जागरूकता: बच्चों और युवाओं के लिए जैव विविधता संरक्षण, जल संवेदनशीलता और जलवायु जिम्मेदारी पर केंद्रित गतिविधियाँ आयोजित की गईं। पौधारोपण और शपथ जैसी पहलें नागरिकों को हरित दिल्ली के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती हैं।

नेताओं की भागीदारी

  • अशोक गार्डन में महोत्सव का उद्घाटन विधायक पूनम भारद्वाज शर्मा ने किया और पहला टिकट खरीदकर नागरिक भागीदारी का संदेश दिया।
  • नरेला के स्मृति वन में सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
  • कल के कार्यक्रम में सांसद परवीन खंडेलवाल के शामिल होने की संभावना है।

“पलाश महोत्सव प्रकृति, समुदाय और पर्यावरण के प्रति हमारी साझा ज़िम्मेदारी का उत्सव है। डीडीए का यह प्रयास न केवल शहर की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि नागरिकों और प्रकृति के बीच गहरा रिश्ता भी बनाता है।” उन्होंने लोगों से अपने परिवारों के साथ महोत्सव में आने और दिल्ली के ग्रीन कवर को बचाने में सहयोग करने की अपील की।

उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना

पलाश महोत्सव 2026 केवल फूलों का उत्सव नहीं, बल्कि दिल्लीवासियों के लिए सामुदायिक जुड़ाव और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का मंच है। यह आयोजन राजधानी में बसंत के आगमन का स्वागत करते हुए नागरिकों को प्रकृति के साथ एक जीवंत अनुभव प्रदान करता है।

—ख़बर यहीं तक

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