DelhiCivicAlerts
Delhi AlertsMunicipal Corporation of Delhi (MCD)

यमुना में कैसे रुके अवैध सीवेज और सेप्टेज डिस्चार्ज? मंत्री ने डीपीसीसी से मांग ली रिपोर्ट

एनजीटी की चेतावनी और जुर्माना लगाए जाने के बावजूद पिछले कई सालों से बिना ट्रीटमेंट का सेप्टेज यमुना में डाला जा रहा है। राजधानी के नालों में बिना ट्रीटमेंट वाले सेप्टेज (सेप्टिक टैंक से निकला अपशिष्ट) से यमुना को प्रदूषित होने से बचाने के लिए
मंत्री ने डीपीसीसी को जांच कर 7 दिन में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा। इसके साथ ही 10 दिन के अंदर टाइमलाइन और विभागीय जिम्मेदारियों के साथ पूरा एक्शन प्लान पेश करने के निर्देश दिए।

दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने
ने बताया, “मैंने इस मुद्दे पर माननीय मंत्री प्रवेश साहिब सिंह जी से चर्चा की है। उन्होंने बताया है कि यह मुद्दा पहले से उनके संज्ञान में है और यह सब पूर्ववर्ती सरकारों की निष्क्रियता और घोर लापरवाही के कारण हुआ है। वे इसको लेकर ठोस कदम उठा रहे हैं।”

, ‘यह पर्यावरणीय लापरवाही पिछली सरकार के समय से चली आ रही है। यह बेहद चौंकाने वाली और अस्वीकार्य बात है कि एनजीटी के हस्तक्षेप, नियमों और 18 करोड़ रुपये के एनवायरमेंटल कंपनसेशन के बावजूद यमुना में बिना ट्रीटमेंट के सेप्टेज डाला जा रहा है।’

यमुना को प्रदूषित होने से रोकने के लिए पूर्ववर्ती सरकार पूरी तरह विफल रही, उनका यमुना के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैया लगातार जारी रहा। तत्कालीन मुख्यमंत्री, जो सीधे दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की देखरेख करते थे, उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की और यमुना प्रदूषण को रोकने में कोई इच्छा शक्ति नहीं दिखाई । एनजीटी की बार-बार की चेतावनियों और हस्तक्षेप के बावजूद, पूर्व सरकार ने यमुना की सफाई को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उनकी चुप्पी और निष्क्रियता यह साफ दिखाती है कि उन्हें न तो दिल्ली के पर्यावरण की चिंता थी और न ही यहां के लोगों की सेहत की। पूर्व मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल ने तो यहां तक कह दिया था कि यमुना की सफाई से वोट नहीं मिलते। यह बयान स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि स्वच्छ यमुना उनकी प्राथमिकताओं में कभी नहीं थी।

यह सुधारात्मक उपाय दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की उस रिपोर्ट के बाद की गई है जो एनजीटी (NGT) को सौंपी गई थी। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि अनाधिकृत कॉलोनियों से निकलने वाला गंदा पानी जल स्रोतों में जा रहा है, जबकि डीजेबी पर पहले ही 18.54 करोड़ का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया जा चुका है।

इससे पहले एनजीटी ने एक संयुक्त समिति का गठन किया था जिसकी अध्यक्षता दिल्ली हाई कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश कर रहे थे और जिसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), DPCC और DJB के सदस्य शामिल थे। समिति ने जो सिफारिशें दी थीं, उनमें दिल्ली जल बोर्ड सेप्टेज प्रबंधन के नियमों को सख्ती से लागू करने पर ज़ोर दिया गया था।

संयुक्त समिति की रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रमुख चुनौती यह थी कि 2018 के मूल नियमों में दिल्ली पुलिस और ट्रैफिक पुलिस जैसे विभागों को एनफोर्समेंट पावर नहीं दी गई थीं। इस कमी को दूर करने के लिए दिल्ली सरकार के शहरी विकास विभाग ने दिल्ली जल बोर्ड सेप्टेज प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2024 अधिसूचित किए। इसके तहत दिल्ली जल बोर्ड, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली पुलिस और नगर निगम को उल्लंघनों पर कार्रवाई करने के अधिकार दिए गए। हालांकि नियमों को मजबूत किए जाने के बावजूद, पूर्ववर्ती सरकार की उदासीनता के कारण समस्या बनी रही और गंदे पानी का अवैध डिस्चार्ज पहले जैसा ही जारी रहा।

अप्रैल 2025 में 2.42 करोड़ लीटर सेप्टेज को कलेक्ट कर ट्रीट किया गया।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने डीपीसीसी को 7 दिन के भीतर अवैध सेप्टेज डंपिंग की पूरी जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, डीपीसीसी को 10 दिन के अंदर एक विस्तृत कार्ययोजना पेश करने को कहा गया है, जिसमें अवैध सीवेज और सेप्टेज डिस्चार्ज को रोकने के लिए स्पष्ट टाइमलाइन और जिम्मेदारियां तय हों।

Related posts

आम आदमी पार्टी की पहल: दिल्ली के 607 सफाई कर्मियों को मिला दिवाली का तोहफा

Ruby Singh

Jetting Machines Roll Out as MCD Steps Up Dust Control Measures

Ruby Singh

एलजी का अभिभाषण और सीएजी रिपोर्ट: दिल्ली विधानसभा की फरवरी सत्र की प्रमुख बातें

Ruby Singh

Leave a Comment