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दिल्ली में डीडीए के बुलडोजर चलने पर क्या है एक्सपर्ट की राय?

पूर्व निगम पार्षद और एकीकृत दिल्ली नगर निगम की निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे जगदीश ममगांई ने डीडीए के बुलडोजर चलने पर चिंता जतलाई और सीधा प्रधानमंत्री से दखल की मांग कर दी।

शहरी मामलों के जानकार जगदीश ममगांई कहते हैं कि
3 जून को डीडीए द्वारा कादीपुर गांव की जमीन पर बसी श्रीश्याम कॉलोनी को बिना अनुमति के अवैध निर्माण बता कर 100 से अधिक घरों को तोड़ने का नोटिस चस्पा करना निंदनीय है। इसकी जितनी भर्त्सना की जाये उतनी कम है। भारत सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (विशेष प्रावधान) अधिनियम के तहत 31 जनवरी 2026 तक 1797 अनधिकृत कालोनियों में तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगाई है। जिनमें 600 से अधिक कालोनियां सरकारी जमीन पर और लगभग 150 कॉलोनियां रिज हरित क्षेत्र में बसी हैं।
श्रीश्याम कॉलोनी तो सरकारी जमीन पर भी नहीं बसी है, वह कादीपुर गांव की जमीन पर बसी है। इस कालोनी में रहने वालों का अपराध सिर्फ इतना है कि उन्होंने औपचारिक नक्शा पास नहीं कराया है। अब सवाल यह उठता है कि पिछले 8-10 वर्ष में जब यहां मकानों का निर्माण हो रहा था तो डीडीए के अधिकारियों ने आरम्भिक चरण में ही निर्माण कार्य को क्यों नहीं रोका? स्पष्ट है कि रिश्वत की पट्टी ने इन अधिकारियों के आँख-कान बंद कर दिए थे। भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से ही डीडीए की अपनी 80 लाख वर्ग मीटर से अधिक जमीन पर अवैद्य कब्ज़ा हो गया।

फरवरी 2025 में जब से दिल्ली में बीजेपी सरकार बनी है, अचानक डीडीए ने वर्षों से निर्मित कॉलोनियों में तोड़फोड़ की कार्रवाई क्यों तेज कर दी है? लगभग एक सप्ताह पूर्व दिल्ली के बुराड़ी स्थित केशव नगर गढ़ी खुसरो इलाके में डीडीए ने 100 से ज्यादा घरों पर तोड़ने का नोटिस चस्पा कर दिया, जिसमें दो दिन के अंदर मकान खाली करने का आदेश दिया गया। 10-11 मई 2025 को डीडीए की टीम दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में बने लक्ष्मी नारायण मंदिर को तोड़ने पहुंच जाती है, विरोध के बावजूद मंदिर परिसर का आधा भाग ध्वस्त कर दिया जाता है। 24 अप्रैल से 26 अप्रैल, 2025 के बीच डीडीए सैनिक फार्म में दो बीघा से अधिक क्षेत्र में फैले फार्महाउसों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई करता है। 20 मार्च को अचानक सुबह करीब 4 बजे डीडीए मयूर विहार इलाके के तीन मंदिरों काली मंदिर, अमरनाथ मंदिर और बद्रीनाथ मंदिर को गिराने के लिए पहुंच जाता है, जन विरोध के बाद डीडीए अभियान स्थगित कर देता है।

डीडीए के अधिकारी यह बताने में नाकाम रहे कि अगर ग्रीन जोन में स्थित होने के कारण वह तीनों मंदिरों को तोड़ने पहुंचे लोगों को भड़काया और फिर कार्रवाई स्थगित क्यों हुई? इनकी देखादेखी अचानक 22 मई को दिल्ली की खिजर बाबा कॉलोनी में 40-50 वर्ष से रह रहे यहां के निवासियों को उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग भी मकान तोड़ने व जमीन खाली करने का नोटिस जारी कर देता है।


इस मामले में प्रधानमंत्री दखल देना चाहिए कि दिल्ली में विभिन्न एजेंसियों द्वारा तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। मास्टर प्लॉन 2041 केन्द्रीय मंत्री परिषद् के पास समीक्षा व निर्णय के लिए सूचीबद्ध है, दिल्लीवासियों की अपेक्षा है कि इसमें दिल्ली में निर्मित अनधिकृत कालोनियों के नियमितीकरण के लिए नीति अधिसूचित हो सकती है।

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