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दिल्ली में बीजेपी का ये दो फार्मूले एक रहा हिट तो दूसरा अनफिट, किसे मिलेगी बीजेपी की तवज्जो

फार्मूला वही लेकिन राज्य अलग.. महाराष्ट्र के बाद दिल्ली जीतने के लिए बीजेपी इस योजना पर कर रही काम

महाराष्ट्र चुनाव के बाद बीजेपी उत्साहित है खासकर दिल्ली जीतने के लिए ऱणनीति भी शुरू कर दी है। राजनीतिक दलों में सत्ताधारी आप को जहां सरकार विरोधी रूझानों से पारकर बीजेपी से लड़ना है तो वहीं कांग्रेस अपनी राजनीतिक ज़मीन वापस पाने के लिए दिल्ली न्याय यात्रा निकाल रही है। खासकर महाराष्ट्र की जीत के बाद बीजेपी की दिल्ली यूनिट ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। सीधे नकद ट्रांसफर के फार्मूले पर आधारित महाराष्ट्र की ‘लाड़की बहिना योजना’ जैसी योजना दिल्ली में भी लाने ला सकती है जिसके लिए रणनीति बनाई जा रही है। बीजेपी का मानना है कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में कल्याणकारी योजनाओं की सफलता दिल्ली में भी दोहराई जा सकती है। महाराष्ट्र में ‘लाडली बहन योजना’ के तहत 21 से 65 साल की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये दिए जा रहे हैं। यह तय है कि बीजेपी महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए डायरेक्ट कैश ट्रांसफर  योजना को बड़ा मुद्दा बना सकती है।

सीधे कैश ट्रांसफर की योजना

घोषणापत्र में महिला आधारित कई वेलफेयर स्कीम्स को शामिल कर सकती है। आप को घेरने के लिए बीजेपी गंदी यमुना, खस्ताहाल सड़कें, बढ़ता प्रदूषण और मुख्यमंत्री आवास पर जैसे मुद्दे पर फोकस करेगी तो नौकरी की सुरक्षा, वेतन बढ़ने और छात्रों के लिए स्कॉलरशिप का मुद्दा उठाएगी। मैनेफेस्टो कोआर्डिनेशन कमिटी से जुड़े बीजेपी के नेता ने बताया कि घोषणापत्र समिति महिलाओं के लिए एक विशेष नकद ट्रांसफर योजना तैयार करेगी। योजना प्रारंभिक चरण मे है।  पार्टी महिला केंद्रित कार्यक्रमों को अपने चुनावी वादे के रूप में पेश करेगी। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि महिला आधारित मुद्दों पर हमारा खास फोकस होगा लेकिन उससे ठीक पहले हम दिल्ली में परिवर्तन यात्रा निकालेंगे. 

इस परिवर्तन यात्रा को निकालने के लिए सचदेवा ने एक 9 सदस्यों की समिति बनाई है जिसके संयोजक दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सतीश उपाध्याय हैं।

आम आदमी पार्टी पहले ही चल चुकी है ये दांव

आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ का 2024-25 के बजट में प्रस्ताव रखा है। जिसमें 18 साल से ज्यादा उम्र की वो महिलाए जो किसी तरह का लाभ नही लेती और ना ही टैक्स जमा करती है उन्हे हर माह 1000 रूपए दिए जाएंगे। AAP के सूत्र बताते हैं कि हैं कि इस योजना को जोर शोर से लागू करवाने की कोशिश आप पार्टी करेगी किसी भी तरह की असफलता मिलने पर इसकी असफलता का मुद्दा बीजेपी को बनाकर चुनाव में उतरेगी।  केजरीवाल ने 80000 और पेंशनर्स को जोड़कर वेलफेयर योजनाओं में राजमनीतिक रूप से बीजेपी से आगे निकलने की कोशिश करेगी।

पिछले 2 विधानसभा चुनाओं में आप को बहुमत मिला था। साल 2015 के विधानसभा चुनाव में आप को बंपर जीत मिली और 67 सीटें जीती तो साल 2020 में 62 सीटों पर जीत हासिल हुई। AAP के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच कांटे की टक्कर है।

विधानसभा चुनावों में ये फार्मूले अनफिट रहे

लोकसभा चुनाव के उलट विधानसभा में बीजेपी लगातार आम आदमी के पीछे रही। बीजेपी को 2013 में 32 विधानसभा सीटें मिली जो सबसे बड़ी पार्टी बनकर हालांकि तब सरकार नहीं बनाने का फैसला किया। साल 2015 में 70 विधानसभा सीटों में वह सिर्फ 3 ही जीत पाई और 2020 में बीजेपी के प्रदर्शन में सुधार आया लेकिन उसके आठ विधायक ही विधानसभा पहुंचे। साल 2015 में 70 में से 67 विधानसभा जीतने वाली आम आदमी पार्टी ने 2020 में 62 सीट जीता और इन प्रदर्शनों के हिसाब सीटे भले घट रही हों लेकिन साल 2024 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की सत्ता में वापसी के चांस मजबूत नजर आ रहे हैं लेकिन जेल से छूटने के बाद चुनाव कैंपेन का केजरीवाल को लोकसभा चुनाव में कोई तत्काल फायदा नहीं मिला। 

पिछले दो विधानसभा चुनाव में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का एजेंडा दिल्ली में नहीं चला। साल 2020 में अरविंद केजरीवाल को आतंकवादी साबित करने की मुहिम भी चली। झारखंड विधानसभा चुनाव में भ्रष्टाचार के मुद्दे का असर नहीं हुआ फर्क यह है कि हेमंत सोरेन जेल जाने से पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था और अरविंद केजरीवाल ने जेल से लौटकर इस्तीफा दिया।

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