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मशीनरी और जगह के घोर अभाव के बीच खुली निगम की नींद, आवारा पशुओं के खिलाफ सख्ती

अलीपुर इलाके में आवारा साड के हमले में सेयोरिटी गार्ड अशोक कुमार की मौत के बाद निगम प्रशासन जाग गया और रोहिणी, मुखर्जी नगर, इंद्रलोक, शास्त्री नगर और कई इलाकों में आवारा पशुओं के खिलाफ कार्रवाई करके 34 आवारा पशुओं को पकड़ भी लिया लेकिन कैटल कैचर स्टाफ की कमी और मशीनरी के अभाव में आगे क्यो होगा कोई नही जानता।  आवारा पशुओं के साथ ही अवैध डेयरियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई हुई।  इन प्रयासों के तहत एमसीडी के विभिन्न क्षेत्रों में चलाए गए अभियान में 34 मवेशियों को पकड़ा गया।

रोहिणी क्षेत्र के रोहिणी सेक्टर 7, सेक्टर 11, सेक्टर 18 और सेक्टर 19 में 11 मवेशी, सिविल लाइंस क्षेत्र के मुखर्जी नगर में 11 मवेशी, सिटी एसपी क्षेत्र के शास्त्री नगर, इंद्रलोक और चांदनी चौक क्षेत्रों में 7 आवारा पशु पकड़े गए। शाहदरा उत्तरी क्षेत्र ने भी अपने क्षेत्रों में 5 पशु पकड़े।

निगम के एक पशु अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुल 12 ज़ोन को मिलाकर सिर्फ 106 कैटल कैचर स्टाफ हैं। सिटी सदर पहाड़गंज ज़ोन में सिर्फ 6 स्टाफ हैं। शाहदरा नॉर्थ और साउथ को मिलाकर सिर्फ 17 स्टाफ, साउथ जोन में 12, सेंट्रल जोन 11, वेस्ट ज़ोन में 12 कैटल केचर स्टाफ ही हैं। जिन गाड़ियों में आवारा पशुओं को पकड़ा जाता है उन कैटल कैचर वीकल की संख्या 12-13 ही है। ज़ोन वाइज़ देखें तो हर एक ज़ोन में सिर्फ 1 ही वीकल हैं।

पशुओं के हमले में इंद्रपुरी, न्यू फ्रैंड्स कॉलोनी, दिल्ली देहात के बवाना और त्रिनगर इलाके में घटनाएं हो चुकी हैं। बंदर के हमले में पूर्व महापौर की भी मौत हो चुकी है। वहीं राजधानी की जिन 4 गौशालाओं में पकड़े गए आवारा  पशुओं को एमसीडी रखती है वो सभी ओवर क्राउडेड (Overcrowded) हैं।  

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