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Motivation & Personality Development

टैलेंट है चमक, टाइमिंग है दमक; दोनों साथ हों तो सफ़र बनता है धमक

कभी-कभी टैलेंट कम भी हो तो चिंता की बात नहीं होती, असली कला है सही समय पर सही जगह मौजूद रहना।
आयुष्मान खुराना की यात्रा इसका उदाहरण है—रेडियो से थिएटर और फिर फिल्मों तक उन्होंने साबित किया कि टैलेंट हो सकता है 19, मगर टाइमिंग 19 नहीं होनी चाहिए। सही वक्त पर सही मंच चुनना ही उनकी सफलता का राज़ बना।

कहानी यही कहती है—टैलेंट है चमक, टाइमिंग है दमक; दोनों साथ हों तो सफ़र बनता है धमक।

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