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सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD का PG सर्वे: 2,453 भवन जांचे, 4 खतरनाक और 85 संभावित कमजोर

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में PG भवनों की सुरक्षा को लेकर किए गए MCD के सर्वे में कई अहम चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं।

दिल्ली नगर निगम ने राजधानी के कुल 2,453 PG भवनों का सर्वे पूरा किया है। इनमें 2,342 भवन यानी करीब 95.5 फीसदी भवन देखने में सुरक्षित पाए गए, जबकि 4 भवनों को दृश्य रूप से खतरनाक और 85 भवनों को संभावित रूप से कमजोर श्रेणी में रखा गया है।


सर्वे के मुताबिक, चार खतरनाक भवनों में कुल 89 लोग रह रहे हैं। इनमें तीन भवन दक्षिण जोन में हैं, जहां 69 लोग रहते हैं, जबकि केशव पुरम जोन में एक खतरनाक भवन मिला है, जिसमें 20 लोग रह रहे हैं।


इसके अलावा 121 भवनों में मरम्मत की जरूरत सामने आई है। इनमें 91 भवन मामूली मरम्मत और 30 भवन बड़ी मरम्मत की श्रेणी में हैं। वहीं, 8 भवन संभावित कमजोर लोड-बेयरिंग संरचना और 77 भवन संभावित कमजोर फ्रेम्ड संरचना के तौर पर चिन्हित किए गए हैं।


सर्वे में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, 2,342 सुरक्षित भवनों में 48,524 लोग, 91 मामूली मरम्मत वाले भवनों में 1,723 लोग और 30 बड़ी मरम्मत वाले भवनों में 448 लोग रह रहे हैं। संभावित कमजोर लोड-बेयरिंग और फ्रेम्ड संरचनाओं में क्रमशः 205 और 2,766 लोग रह रहे हैं।


दक्षिण जोन का एक डिवीजन सबसे ज्यादा चिंता में


सर्वे में दक्षिण जोन के EE/B/II/SZ डिवीजन की स्थिति विशेष रूप से सामने आई है। यहां सर्वे किए गए सभी 56 PG भवन G+4 से अधिक ऊंचाई वाली फ्रेम्ड संरचनाएं पाए गए और इन्हें संभावित कमजोर श्रेणी में रखा गया है। इन भवनों में कुल 2,162 लोग रह रहे हैं।
सिविल लाइंस में 64 भवनों में मरम्मत की जरूरत
सिविल लाइंस जोन के EE/B/I/CLZ डिवीजन में 608 PG भवनों का सर्वे किया गया।

इनमें 544 सुरक्षित मिले, जबकि 38 में मामूली और 26 में बड़ी मरम्मत की जरूरत पाई गई। इसके अलावा एक लोड-बेयरिंग और पांच फ्रेम्ड संरचनाओं को संभावित कमजोर श्रेणी में रखा गया।
करोल बाग में 365 भवनों के सर्वे में पांच भवनों में मामूली और एक में बड़ी मरम्मत की जरूरत मिली। छह संभावित कमजोर फ्रेम्ड संरचनाएं भी चिन्हित हुईं।


केशव पुरम में 321 भवनों में एक खतरनाक भवन मिला, जिसमें 20 लोग रह रहे हैं। नजफगढ़ में 106 भवनों में 10 मामूली और दो बड़ी मरम्मत वाले भवन पाए गए।


1 जून से 15 सितंबर तक MCD की कार्रवाई


MCD के मुताबिक, 1 जून से 15 सितंबर के बीच अवैध और असुरक्षित निर्माण के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई। इस दौरान 589 सीलिंग एक्शन, 1,254 डेमोलेशन एक्शन और 782 डेमोलेशन ऑर्डर जारी किए गए। MCD के मुताबिक, पांच मंजिल या उससे अधिक ऊंची 77 ऐसी इमारतों को नोटिस भी दिया गया है, जिनकी जांच की जा रही है।




सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने भी छात्र हॉस्टल की कमी पर चिंता जताई थी और कहा था कि हॉस्टल की कमी छात्रों को असुरक्षित PG आवास में रहने के लिए मजबूर कर सकती है।


ऐसे में दिल्ली सरकार की 10 हजार नए बेड की घोषणा के साथ MCD का PG सुरक्षा सर्वे और DU की लंबित हॉस्टल परियोजना छात्र आवास और सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ले आई है।

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