हम सब बचपन से ये कहानी सुनते आ रहे हैं। फिर पढ़िए क्योंकि आप बार-बार भूल जाते हैं। काफी बड़े हो गये हैं ना? एक बार जंगल में दौड़ का ऐलान हुआ। खरगोश अपनी तेज़ रफ्तार पर इतराता रहा, जबकि कछुआ चुपचाप अपनी धीमी लेकिन स्थिर चाल से आगे बढ़ता रहा। रास्ते में खरगोश ने मज़ाक उड़ाया, पत्थर फेंके, और बार-बार उसे रोकने की कोशिश की। लेकिन कछुआ अपने कवच में सिमटकर हर चोट को सह गया और बिना विचलित हुए चलता रहा। अंत में वही कछुआ मंज़िल तक पहुँचा, जबकि खरगोश अपनी ही लापरवाही में पीछे रह गया।
जीवन और राजनीति दोनों में असली जीत गति से नहीं, बल्कि धैर्य और अनुशासन से मिलती है। जब विरोधी हमला करें, तो कछुए की तरह अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें। सुरक्षा कवच है आपका आत्मबल और निरंतरता। यही आपको मंज़िल तक पहुँचाएगा, चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो।

