DelhiCivicAlerts
BREAKING NEWSDelhi AlertsMunicipal Corporation of Delhi (MCD)

दिल्ली नगर निगम बोला—यमुना खादर में नहीं डाला जा रहा कचरा

दिल्ली नगर निगम ने ओखला लैंडफिल से कूड़े की अवैध डंपिंग के आरोपों का किया खंडन, कहा-बायोमाइनिंग से प्राप्त इनर्ट मिट्टी का एनटीपीसी बदरपुर इको पार्क के पास स्वीकृत स्थल पर वैज्ञानिक निपटान किया जा रहा है

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ओखला लैंडफिल साइट से यमुना खादर क्षेत्र एवं आसपास के इलाकों में अवैध रूप से कचरा डंप किए जाने के आरोपों का गंभीरता से संज्ञान लिया है। ये रिपोर्ट्स तथ्यहीन एवं भ्रामक हैं। इन रिपोर्ट्स में यह आरोप लगाया गया है कि पॉलिथीन, कांच, कपड़ा एवं मलबा युक्त कचरा ओखला से लाकर मदनपुर खादर एक्सटेंशन सहित अन्य क्षेत्रों में अनियंत्रित रूप से डाला जा रहा है तथा भलस्वा के मामले में भी इसी प्रकार की गतिविधियां की जा रही हैं। एमसीडी इन आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन करती है।

यह स्पष्ट किया जाता है कि ओखला लैंडफिल साइट से जो सामग्री परिवहन की जा रही है, वह बिना प्रोसेस हुआ कचरा नहीं है, बल्कि बायो-माइनिंग एवं बायो-रिमेडिएशन की वैज्ञानिक प्रक्रिया से उत्पन्न इनर्ट तथा निर्माण एवं विध्वंस (सी एंड डी) सामग्री है। इस सामग्री को एनटीपीसी बदरपुर इको पार्क के निकट स्थित एक निर्धारित एवं स्वीकृत स्थल पर ले जाया जा रहा है, जहां इसका उपयोग 42 एकड़ निम्न-स्तरीय भूमि को भरने के लिए किया जा रहा है। यह भूमि भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय/ भूमि एवं विकास कार्यालय के अधीन है, और इस उद्देश्य के लिए एमसीडी एवं उसके कंसेशनायर द्वारा आवश्यक अनुमतियां विधिवत प्राप्त की गई हैं।

चिह्नित स्थल यमुना नदी से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है तथा इनर्ट एवं सी एंड डी सामग्री का उपयोग भूमि भराव के लिए स्वीकृत योजना का हिस्सा है। यमुना के बाढ़ क्षेत्र में किसी भी प्रकार का बिना प्रोसेस किया हुआ कचरा नहीं डाला जा रहा है। प्रतिदिन लगभग 6,000 से 8,000 मीट्रिक टन इनर्ट एवं सी एंड डी, जो ओखला में बायो-माइनिंग से उत्पन्न हो रहा है, को नियंत्रित एवं निगरानी के तहत इस स्थल तक पहुंचाया जा रहा है।

एमसीडी अपने तीन प्रमुख लैंडफिल स्थलों ओखला, भलस्वा एवं गाजीपुर पर बड़े पैमाने पर लीगेसी वेस्ट की बायो-माइनिंग कर रहा है। ये तीनों स्थल लगभग 202 एकड़ क्षेत्र में फैले हुए हैं और वर्ष 2019 तक यहां लगभग 280 लाख मीट्रिक टन कचरा जमा हो चुका था। निरंतर डंपिंग के कारण इन स्थलों पर कचरे के पहाड़ 50–60 मीटर तक ऊंचे हो गए थे, जबकि इनकी क्षमता पहले ही समाप्त हो चुकी थी। माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों के अनुपालन में वर्ष 2019 में बायो-माइनिंग कार्य शुरू किया गया।

बायो-माइनिंग प्रक्रिया के माध्यम से कचरे को वैज्ञानिक तरीके से अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जाता है—रिफ्यूज-डेराइव्ड फ्यूल यानी आरडीएफ (जैसे प्लास्टिक, रबर, लकड़ी एवं कपड़ा), निर्माण एवं विध्वंस सामग्री (जैसे ईट, पत्थर एवं मलबा), तथा भूमि भराव के लिए उपयुक्त इनर्ट सामग्री। इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जिसमें जुलाई 2022 से 29 मार्च 2026 के बीच लगभग 186 लाख मीट्रिक टन कचरे का बायो-माइनिंग किया जा चुका है। विभिन्न स्थानों पर कचरे के पहाड़ों की ऊंचाई में लगभग 30–40 मीटर की कमी आई है तथा लगभग 75 एकड़ भूमि को पुनः प्राप्त किया गया है, जिसमें गाजीपुर में 15 एकड़, भलस्वा में 40 एकड़ तथा ओखला में 20 एकड़ भूमि शामिल हैं।

लीगेसी वेस्ट के पूर्ण निस्तारण के लक्ष्य लिए निर्धारित समयसीमा ओखला के लिए जुलाई 2026, भलस्वा के लिए दिसंबर 2026 तथा गाजीपुर के लिए दिसंबर 2027 है। एमसीडी पुनः स्पष्ट करता है कि सभी कचरा प्रसंस्करण, परिवहन एवं निपटान गतिविधियां वैज्ञानिक, पारदर्शी एवं पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप की जा रही हैं।

नागरिकों से अपील है कि वे भ्रामक रिपोर्ट्स से प्रभावित न हों। एमसीडी राजधानी को स्वच्छ, स्वस्थ एवं सतत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

—ख़बर यहीं तक

Related posts

क्या तोड़े जाएंगे लोगों के घरों के बाहर ढंके हुए स्टॉर्म ड्रेनेज, मास्टर प्लान लागू होने में सबसे बड़ी बाधा

delhicivicalerts

Home Minister Amit Shah should resign owning responsibility for the Red Fort metro station car bomb blast, which claimed the lives of many innocent people and seriously injured several others, and the total failure of security in the country —Devender Yadav

delhicivicalerts

21 महीनों तक चले आपातकाल में लाखों लोगों को बिना कारण जेल में डाला गया- मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

delhicivicalerts

Leave a Comment