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Motivation & Personality Development

काम टालना डर को पालना है

राहुल हमेशा सोचता रहता था—“क्या मैं तैयार हूँ? क्या मैं उतना योग्य हूँ?” उसकी यही दुविधा उसे पीछे खींचती थी। हर बार काम टालने से उसका डर और बड़ा हो जाता।

एक दिन उसके गुरु ने कहा— “उम्मीद सिर्फ सोच है, लेकिन प्रयास ही असली ताक़त है। जब प्रतियोगिता करो, तो यह मत सोचो कि सामने वाला तुमसे बेहतर है। सोचो—‘मेरे जैसा कोई नहीं।’ मेरी क्षमता बेमिसाल है. यही विश्वास तुम्हें जीत की ओर ले जाएगा।”

राहुल ने पहली बार बिना झिझक कदम बढ़ाया। उसने पाया कि डर सिर्फ इंतज़ार में बढ़ता है, काम शुरू करने से घटता है।

Fear grows in delay, faith wins in play — डर इंतज़ार में बढ़ता है, विश्वास कदमों में जीतता है।

किसी व्यक्ति की दौड़ में स्थिति—वह आगे रहेगा या पीछे—पूरी तरह उसकी तैयारी पर निर्भर करती है। तैयारी कोई तात्कालिक चीज़ नहीं; इसमें समय, मेहनत और त्याग की आवश्यकता होती है। यह काम आपके लिए कोई दूसरा नहीं कर सकता।

हर परिस्थिति में तीन बातें स्पष्ट होनी चाहिए: क्या करना है? कैसे करना है? और क्या वह वास्तविक परिणाम दे पाएगा?

आत्म-विकास का “कैसे” वाला हिस्सा ही आपकी कार्ययोजना तय करता है—यानी वही दिशा जो आपको आगे बढ़ाती है।

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