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पूर्वांचल विश्वविद्यालय को तकनीक और विद्यार्थियों की जरूरतों से जोड़ने का संकल्प, नए कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने संभाला कार्यभार

जौनपुर: वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में मंगलवार को नए नेतृत्व की शुरुआत हुई। सूचना प्रौद्योगिकी और उच्च शिक्षा प्रशासन का अनुभव रखने वाले प्रो. राकेश कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने पूर्व कुलपति प्रो. वंदना सिंह से कार्यभार संभाला। विश्वविद्यालय पहुंचने पर शिक्षकों और कर्मचारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।

पदभार संभालने के बाद प्रो. सिंह ने जिस प्राथमिकता को सामने रखा, उसका केंद्र विश्वविद्यालय की इमारतें या केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि विद्यार्थी हैं। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास पूर्वांचल विश्वविद्यालय को तकनीक-सक्षम, पारदर्शी, जवाबदेह और विद्यार्थी-केंद्रित उच्च शिक्षण संस्थान के रूप में विकसित करने का होगा।

पढ़ाई से परीक्षा तक डिजिटल बदलाव पर जोर

नए कुलपति ने संकेत दिया कि विश्वविद्यालय की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं में तकनीक का इस्तेमाल केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहेगा। पढ़ाई, प्रवेश, परीक्षा, परिणाम, शोध, छात्र सुविधाओं और प्रशासनिक कार्यों को अधिक सरल और सुगम बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल किया जाएगा।

आज के विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय केवल कक्षा और परीक्षा तक सीमित नहीं है। प्रवेश से लेकर परिणाम तक की प्रक्रिया, प्रमाणपत्र, शिकायतों का समाधान और प्रशासन से संवाद—हर कदम पर तेज और पारदर्शी व्यवस्था की अपेक्षा रहती है। ऐसे में डिजिटल प्रशासन का मजबूत होना विद्यार्थियों के अनुभव को सीधे प्रभावित कर सकता है।

शोध और नवाचार को मिलेगी नई दिशा

पूर्वांचल विश्वविद्यालय पूर्वी उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में प्रो. सिंह ने शोध और नवाचार को अपनी प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया है।

उनका जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिसमें शोध को प्रोत्साहन मिले और संस्थान के कामकाज में जवाबदेही हर स्तर पर दिखाई दे। इसके लिए मजबूत डिजिटल प्रशासनिक ढांचा विकसित करने की बात कही गई है।

इंटरनेट और शिकायतों पर भी नजर

नए कुलपति ने विद्यार्थियों की बुनियादी जरूरतों को भी महत्वपूर्ण बताया। इंटरनेट और अन्य छात्र सुविधाओं की लगातार निगरानी, विद्यार्थियों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना और संवाद के जरिए समाधान निकालना उनके एजेंडे का हिस्सा होगा।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्वविद्यालय की वास्तविक तस्वीर अक्सर उसके बड़े दावों से नहीं, बल्कि छात्र को रोज मिलने वाली सुविधाओं से तय होती है। एक विद्यार्थी के लिए अच्छी इंटरनेट सुविधा, समय पर परिणाम, स्पष्ट प्रशासनिक प्रक्रिया और शिकायत पर सुनवाई उसकी पूरी शैक्षणिक यात्रा को आसान बना सकती है।

बदलाव में पूरे विश्वविद्यालय परिवार की भागीदारी

प्रो. राकेश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय में बदलाव किसी एक व्यक्ति के प्रयास से संभव नहीं होगा। शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी, शोधार्थी और संबद्ध महाविद्यालय—सभी को इस परिवर्तन यात्रा का सहभागी बनाना होगा।
उनके संदेश में प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच संवाद को भी अहमियत दी गई है। इसका अर्थ है कि विश्वविद्यालय को केवल ऊपर से संचालित व्यवस्था के बजाय ऐसी संस्था बनाने की कोशिश होगी, जहां छात्रों की आवाज भी निर्णय प्रक्रिया तक पहुंचे।

कार्यभार ग्रहण करने के बाद कुलपति ने मुक्तांगन परिसर में पौधरोपण भी किया। यह प्रतीकात्मक पहल उनके कार्यकाल की शुरुआत को शिक्षा, विकास और परिसर के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ती नजर आई।

अब विश्वविद्यालय परिवार की नजर इस बात पर रहेगी कि तकनीक, पारदर्शिता और छात्र-केंद्रित व्यवस्था की यह प्राथमिकताएं आने वाले समय में जमीन पर किस रूप में दिखाई देती हैं। पूर्वांचल के हजारों विद्यार्थियों के लिए यह बदलाव केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि उनकी शिक्षा को अधिक सहज, पारदर्शी और अवसरों से जोड़ने की उम्मीद भी है।

-ख़बर यहीं तक

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