दिल्ली पुलिस को ही लीजिए. इलाके में एसएचओ का बॉस भले ही एसीपी होता हो लेकिन रोज़ाना मसलों में उसकी भूमिका सिर्फ एक डाकिया की होती है जो सब डिविजन स्तर पर सारी जानकारी अपने ऊपर डीसीपी को देता है। लेकिन क्या हो अगर डीसीपी इलाके में कोई खास दौरा करे और एसएचओ तक को पता न हो तो लगता है डीसीपी साहब ने ऐसा क्यों किया?
दोनों के बीच कुछ पक तो नहीं रहा। लेकिन ये कानफूसी दिल्ली पुलिस वाली नहीं बल्कि एमसीडी में हुई। दरअसल, एमसीडी में एसीपी की तरह ही SE(Superintending Engineer) आम तौर पर कई डिवीज़नों या प्रोजेक्ट्स की देखरेख करता है, एग्ज़िक्यूटिव इंजीनियर्स (EE) की निगरानी करता है और तकनीकी व प्रशासनिक मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करता है।
लेकिन, निगम है तो कुछ अनोखा होगा ही, सिविक सेंटर में फुसफुसाहट यही है कि नए-नवेले उपायुक्त ने SE को साथ दौरा कर लिया। और एग्ज़िक्यूटिव इंजीनियर्स (EE) तो छोड़िए इलाके के JE → AE → EE तक को कानोकान ख़बर नहीं हुई। जानकारों की जुबान पर सवाल है कि आखिर मकसद क्या था—सिर्फ निरीक्षण या कुछ और? पता लगा कि गुपचुप तरीके से भवन विभाग के अधीक्षण अभियंता के साथ इलाके में कुछ खास संपत्तियों का दौरा हुआ—वो भी बिना EE, AE और JE की जानकारी में। सवाल यही है कि गुप्त दौरा क्यों?….धीरे-धीरे बोल कोई सुन ना ले….सुन ना ले बाबा सुन ना ले….

