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ज्ञान का आधुनिक मंदिर: जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय का लोकार्पण

सार्वजनिक ज्ञान संवर्धन अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने तथा समाज में पठन-पाठन की सशक्त संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के अंतर्गत, माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री – अमित शाह ने आज नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् (एनडीएमसी) द्वारा उद्यान मार्ग, नई दिल्ली में नवनिर्मित हाई-टेक, डिजिटल एवं अत्याधुनिक लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपीएन) सार्वजनिक पुस्तकालय का लोकार्पण किया।

उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि किसी देश का भविष्य कृषि, बाज़ार या उद्योग से नहीं, बल्कि उसके पुस्तकालयों में जुटने वाली युवाओं की भीड़ से तय होता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को आगे बढ़ाने वाली, राष्ट्र-निर्माण और राष्ट्र को वैभव दिलाने वाली सारी गतिविधियों का मूल ज्ञान एवं विवेक में होता है। यह ज्ञान सिर्फ एक पुस्तकालय ही दे सकता है।

अमित शाह ने युवा पीढ़ी से अपील की कि वे एक बार पुस्तकालय से अवश्य जुड़ें। पढ़ने की आदत बनते ही अच्छे-बुरे का विवेक स्वयं जाग जाएगा। गृह मंत्री ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि जिस छोटे से कस्बे में वह पैदा हुए और उनका बचपन बीता, वहाँ एक समृद्ध पुस्तकालय था। उन्होंने कहा कि उस पुस्तकालय से जुड़ने के कारण उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन आया। उन्होंने कहा कि ‘अलादिन और जादुई चिराग’, ‘अलीबाबा और चालीस चोर’, ‘सिंदबाद की यात्रा’ जैसी किताबें पढ़ते-पढ़ते कब उनकी अध्ययन यात्रा वेदों और उपनिषदों तक पहुंच गई, उन्हें पता नहीं चला।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज सभागार में उन्होंने एक वाक्य लिखा देखा कि “बोलने से पहले सोचना चाहिए, क्योंकि शब्द कभी वापस नहीं आते।” उन्होंने कहा कि कोई भी वाक्य बोलने से पहले सोचना चाहिए और सोचने से पहले पढ़ना चाहिए कि क्या सोचना है, और यह संस्कार सिर्फ पुस्तकालय से ही मिल सकता है।

अमित शाह ने कहा कि पुस्तकालय का उनके जीवन में बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि अपने संसदीय क्षेत्र में उन्होंने एक छोटा सा प्रयोग किया है। उनके संसदीय क्षेत्र के लगभग हर गाँव में एक पुस्तकालय खोला गया है, जिनमें लगभग 3-4 हजार पुस्तकें हैं। इन पुस्तकालयों को मुख्य पुस्तकालय से लिंक किया गया है, जिसमें सवा लाख पुस्तकें हैं। इसके अलावा, चार मोबाइल वैन भी चलाई गई हैं। उन्होंने कहा कि गांवों के बच्चे पुस्तकालय में अपनी पसंद की पुस्तक का नाम लिख कर उसे मँगवाने का अनुरोध करते हैं, और हर शुक्रवार के दिन बच्चों को उनकी पसंद की पुस्तक गांव में ही उपलब्ध कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि हमने हर पुस्तकालय को स्कूलों से जोड़ने का प्रयास किया है।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम से समर्पित यह पुस्तकालय युवाओं के ज्ञान और चिंतन का नया केंद्र बनेगा। उन्होंने दिल्ली सरकार से आग्रह किया कि वह दिल्ली के सभी पुस्तकालयों को आपस में लिंक करें और स्कूलों को इनसे जोड़ने के लिए एक ठोस योजना बनाएं। उन्होंने कहा कि एक कार्ययोजना बनाकर पुस्तक प्रेमियों को पुस्तकालयों से जोड़ने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय के कर्मियों से भी आग्रह किया कि वे नई दिल्ली के आसपास के 10 विधानसभा क्षेत्रों के सभी स्कूलों से संपर्क कर युवाओं को पुस्तकालय से जोड़ें और उन्हें यहाँ आने के लिए प्रेरित करें। एक बार जब युवा पढ़ने की आदत बना लेंगे, तो वह स्वयं आगे बढ़ेंगे।

गृह मंत्री, अमित शाह

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान सागर में गोता लगाने का साहस देता है और सागर के नीचे पड़े मोतियों व रत्नों को चुनकर ऊपर लाने की प्रेरणा भी देता है। ज्ञान सागर के गोते से निकले ये मोती और रत्न ही व्यक्तित्व को निखारते हैं, देश को आगे बढ़ाते हैं, देश को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाते हैं, देश को संस्कारित, शिक्षित और सुरक्षित बनाते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्यकार रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी को पढ़े बिना इस देश की आत्मा, संस्कृति, स्वाभिमान और संघर्ष को नहीं जाना जा सकता, और पुस्तकालय इसमें सबसे मज़बूत ज़रिया बन सकता है।

जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय भवन में 30,000 से अधिक पुस्तकों का संग्रह है। यहां रिसर्च करने वालों के लिए अलग व्यवस्था है, बहुउद्देशीय आधुनिक सभागार है, आधुनिक रीडिंग एरिया है, किड्स जोन है, रिसर्च सेंटर है और ई-लाइब्रेरी है, जिसमें 1 करोड़ पुस्तकें ऑनलाइन पढ़ी जा सकती हैं। वाई-फाई फ्री है। कई मॉनिटर लगाए गए हैं, जहां पुस्तकालय में अध्ययन के लिए आने वाले लोग नोट्स ले सकते हैं, डाउनलोड कर सकते हैं और अपनी विचार प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं। आरएफआईडी आधारित अत्याधुनिक पुस्तक प्रबंधन प्रणाली लागू है। ओपेक कैटलॉग के माध्यम से नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया से भी जुड़ाव होगा। पुस्तकालय में 1 करोड़ ई-बुक्स उपलब्ध हैं। यह दिल्ली के युवाओं के लिए बहुत बड़ा अवसर है कि उन्हें मुफ़्त में 1 करोड़ ई-बुक्स और 32,000 भौतिक पुस्तकों का एक्सेस होगा।

अमित शाह ने कहा कि जयप्रकाश नारायण (जेपी) एक ऐसे विचारक और क्रांतिकारी थे, जिन्होंने जीवन में अनेक विचारधाराओं को अपनाया और हर क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने का प्रयास किया। वे भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख सेनानी थे। आजादी के बाद उन्होंने सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया। समाजवाद अपनाया, समाजवादी कांग्रेस बनाई, विनोबा भावे के भूदान आंदोलन और सर्वोदय विचारधारा को गांव-गांव तक फैलाया। चंबल क्षेत्र में 250 से अधिक डाकुओं को सरेंडर कराया और चार राज्यों के 22 जिलों में डकैती की समस्या समाप्त की।

शाह ने कहा कि इमरजेंसी के समय जेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री का डटकर विरोध किया, बिहार-गुजरात में छात्र आंदोलनों का नेतृत्व किया और ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान दिया। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान जेपी, अटल जी, अडवाणी जी सहित हजारों नेताओं को जेल में डाला गया। तब दिनकर जी का नारा “अंधेरे में एक प्रकाश, जयप्रकाश” पूरे देश में गूंजा। 1977 के चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री रायबरेली से हारीं और पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। उन्होंने कहा कि जेपी ने पूरी जिंदगी लोकतंत्र की रक्षा की। श्री शाह ने कहा कि जेपी का कथन था – “देश प्रधानमंत्री से नहीं बनता, देश करोड़ों भारतीयों से बनता है और प्रधानमंत्री करोड़ों भारतीयों का प्रतिनिधि होता है।” इस एक वाक्य ने पूरे देश में चेतना जागृत की और परिवर्तन लाने का काम किया।

गृह मंत्री ने दिल्ली के सभी किशोरों और युवाओं से अपील की कि वे ज्ञान की पिपासा तृप्त करने के माध्यम के रूप में शुरू किए गए जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे पुस्तकालय का लाभ उठाकर अपने जीवन को निखारें और देश को वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दें।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि आज का दिन दिल्लीवासियों के लिए अत्यंत सौभाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के करकमलों द्वारा राजधानी को लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी के नाम पर एक आधुनिक और भव्य सार्वजनिक पुस्तकालय की सौगात मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जयप्रकाश नारायण पुस्तकालय का उद्घाटन दिल्लीवासियों के लिए एक बड़ी सौगात है। उन्होंने कहा कि यह सार्वजनिक पुस्तकालय युवाओं और विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन सिद्ध होगा। विशेष रूप से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को यहां अध्ययन के लिए बेहतर वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए सभी संबंधित संस्थाओं और अधिकारियों को शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तकालय दिल्ली के युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं को नई दिशा प्रदान करेगा।

अपने स्वागत संबोधन में एनडीएमसी के अध्यक्ष – केशव चंद्र ने कहा कि यह पुस्तकालय भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात समाजवादी चिंतक एवं दूरदर्शी नेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रेरणादायी विरासत को समर्पित है। उन्होंने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा प्रतिपादित “सम्पूर्ण क्रांति” केवल राजनीतिक परिवर्तन का आह्वान नहीं थी, बल्कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों, जनभागीदारी एवं राष्ट्र निर्माण की व्यापक अवधारणा थी। हमें विश्वास है कि यह पुस्तकालय इन आदर्शों को आगे बढ़ाने तथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने का प्रभावी माध्यम बनेगा।

उन्होंने बताया कि नव उद्घाटित यह पुस्तकालय 2,265.30 वर्गमीटर क्षेत्रफल में निर्मित भूतल सहित दो मंजिला भवन में स्थापित है। इसमें लगभग 200 पाठकों के एक साथ बैठकर अध्ययन करने की व्यवस्था है। पुस्तकालय में 35,000 से अधिक पुस्तकों, शोध पत्रिकाओं एवं संदर्भ प्रकाशनों का समृद्ध संग्रह उपलब्ध है, जो शिक्षा, अनुसंधान तथा सामान्य ज्ञान सहित विभिन्न विषयों को समाहित करता है। उन्होंने आगे बताया कि पुस्तकालय में एक आधुनिक ई-लाइब्रेरी अनुभाग भी स्थापित किया गया है, जिसमें विभिन्न ऑनलाइन पुस्तकालयों की सदस्यता उपलब्ध कराई गई है। इसके माध्यम से पाठकों को एक करोड़ से अधिक ई-पुस्तकों एवं डिजिटल कैटलॉग तक पहुँच प्राप्त होगी।

एनडीएमसी के उपाध्यक्ष – कुलजीत सिंह चहल ने माननीय प्रधानमंत्री – नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी मार्गदर्शन एवं प्रेरणा तथा माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री – श्री अमित शाह जी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया कि उन्होंने राष्ट्र की राजधानी के नागरिकों को अत्याधुनिक लोकनायक जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह आधुनिक ज्ञान केन्द्र युवाओं के लिए शिक्षा, नवाचार एवं बौद्धिक उत्कृष्टता का प्रेरणास्रोत बनेगा तथा उन्हें विकसित भारत @2047 के निर्माण में सार्थक योगदान देने के लिए सशक्त करेगा।

चहल ने माननीय केंद्रीय गृह मंत्री को आश्वस्त किया कि एनडीएमसी उनके द्वारा दिए गए प्रत्येक सुझाव एवं मार्गदर्शन को पूर्ण निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ अक्षरशः लागू करेगी, ताकि यह पुस्तकालय ज्ञान, उत्कृष्टता एवं जनसेवा का एक आदर्श संस्थान बन सके। उन्होंने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए) एवं स्थानीय निवासियों के निरंतर सहयोग के लिए उनका हार्दिक आभार व्यक्त किया तथा उनसे अपील की कि वे इस पुस्तकालय के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं जनभागीदारी में एनडीएमसी के सक्रिय सहयोगी बनें, जिससे यह आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता का एक जीवंत केन्द्र बन सके।


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