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राजधानी दिल्ली में पहली बार खुला ऐसा कोई रिसर्च सेंटर जहां जनजातियों पर होगी खोज़,

“भगवान बिरसा मुंडा भवन” में जनजातीय अनुसंधान, युवा नेतृत्व प्रशिक्षण और जनजागरण का सेंटर तो होगा ही ये जनजातीय ज्ञान परंपराओं को संरक्षित भी करेगा। देश भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती (2024–2025) मना रहा है।

आपको बता दें,अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा “भगवान बिरसा मुंडा भवन”—एक जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र—का भव्य लोकार्पण रविवार को पुष्प विहार में हुआ।

अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के अध्यक्ष सत्येन्द्र सिंह ने कहा कि भारत की जनजातीय समाज ने आदिकाल से ही प्रकृति का संरक्षण और संवर्धन अपने जीवन मूल्यों और आस्था से किया है। कल्याण आश्रम निरंतर जनजातीय अस्मिता और अस्तित्व की रक्षा तथा उनके सर्वांगीण विकास हेतु कार्य करता रहा है।

शहरी विकास एवं ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सरकार की ओर से जनजातीय समाज के लिए अधोसंरचना और कल्याणकारी योजनाओं की प्रतिबद्धता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह भवन अनुसंधान, प्रशिक्षण और नेतृत्व विकास का केंद्र बनेगा तथा समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।

जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने, कहा कि भारतीय सभ्यता में जनजातीय समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भगवान बिरसा मुंडा भवन जनजातीय जीवन और संस्कृति को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अल्पसंख्यक कार्य एवं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि भारत के पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक की जनजातीय समाज देश की मुख्यधारा का अभिन्न अंग है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्राचीन काल से लेकर आज तक जनजातीय समाज ने भारत की सीमाओं की रक्षा की है। उन्होंने आगे कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम ही वह संस्था है जिसने जनजातीय समाज के साथ हृदय से जुड़ाव स्थापित किया है—न कि दाता की तरह, बल्कि अपने ही भाई-बंधुओं की तरह।

पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि जी महाराज (जीवन दीप आश्रम, रुड़की) ने जनजातीय समाज और पूरे राष्ट्र के लिए आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। स्वामी जी ने कहा कि प्रकृति की कीमत पर होने वाला विकास वास्तव में विकास नहीं, बल्कि विनाश है। उन्होंने बल देकर कहा कि जनजातीय समाज को उनके क्षेत्रों में होने वाले विकास कार्यों में अपनी बात कहने का अवसर मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने कल्याण आश्रम के कार्यों को दिव्य और पुण्य सेवा बताया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय पहचान के निर्माण में जनजातीय धरोहर का महत्व अत्यधिक है। उन्होंने कहा कि अपने आरंभ से ही वनवासी कल्याण आश्रम ने सक्षम, स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर जनजातीय समाज बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने आश्रम और उसके कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की, जो जनजातीय अस्मिता और अस्तित्व की रक्षा तथा उनके सर्वांगीण विकास हेतु निरंतर समर्पित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्य ऐसे होने चाहिए जो समाज को सशक्त बनाएँ, न कि उन्हें विस्थापित करें। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज को संग्रहालय की वस्तु नहीं, बल्कि जीवंत संस्कृति के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भगवान बिरसा मुंडा भवन के माध्यम से यह कार्य और अधिक प्रभावी रूप से आगे बढ़ेगा।

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