अभी तक की मॉनिटरिंग से ये साफ नहीं हो पा रहा कि दिल्ली के इलाके में प्रदूषण कैसे बदल रहा है और किन स्रोतों से आ रहा? रियल टाइम डेटा मिले और सटीक एक्शन लेने के लिए अब दिल्ली में जिन 6 जगहों पर स्टेशन लगेंगे वो हैं– जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU), मालचा महल के पास ISRO अर्थ स्टेशन, दिल्ली कैंट, कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (वेस्ट कैंपस)।
ये सभी दक्षिण, मध्य और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के अहम संस्थानों और रिहायशी इलाकों को कवर करेंगे, जिससे पूरे शहर की हवा की पारिस्थितिकी अध्ययन और अधिक मजबूत होगा।
नए स्टेशन DPCC और CPCB के डिजिटल सिस्टम से पूरी तरह जुड़े रहेंगे। सभी जगह दिन–रात दिखने वाले इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड भी लगेंगे, ताकि आम लोग अपने इलाके की हवा की स्थिति रीयल टाइम में देख सकें।
सभी मशीनें 24×7 चलेंगी और डेटा छोटे-छोटे अंतराल पर रिकॉर्ड होगा। यह डेटा तय मानकों के अनुसार जाँचा-परखा जाएगा और दैनिक, साप्ताहिक और मासिक रिपोर्टों में इस्तेमाल होगा।
डेटा को मानकों के अनुसार कलेक्ट करके वेरिफाई किया जाएगा। हॉटस्पॉट की भी नए तौर पर पहचाना जाएगा।
चयनित तकनीकी पार्टनर अगले 10 साल तक स्टेशनों को चलाएगा और उनको मेंटेन करेगा। इसमें 24×7 ऑपरेशन, नियमित सर्विसिंग, समय–समय पर कैलिब्रेशन, सुरक्षा और तकनीकी सहायता शामिल है। डेटा क्वॉलिटी 90 प्रतिशत से नीचे नहीं जा सके—इसके लिए सख्त मानक और पेनल्टी भी रखी गई हैं।
मंत्री सिरसा ने बताया कि हर स्टेशन में अत्याधुनिक एनालाईज़र लगाए जा रहे हैं, जो लगातार PM2.5, PM10, सल्फर डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, अमोनिया, कार्बन मोनोऑक्साइड, ओज़ोन और BTEX जैसे प्रदूषकों को मापेंगे। इसके साथ ही हवा की दिशा–गति, तापमान, नमी, बारिश और सोलर रेडिएशन जैसी पूरी मौसम संबंधी जानकारी भी रिकॉर्ड होगी, ताकि प्रदूषण के फैलाव को वैज्ञानिक तरीके से समझा जा सके।
—ख़बर यहीं तक

