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MCD हेरिटेज़ सेल का कमाल;  ‘सराय जूलियाना’ को खोज़ निकाला

एमसीडी हेरिटेज़ सेल ने तो कमाल ही कर दिया। फ्लाईओवर के नीचे छिपे इतिहास को ना केवल ढूंढ निकाला बल्कि दस्तावेजों और तस्वीरों के जरिए ऐतिहासिक ‘सराय जूलियाना’ के छिपे रहस्य को उजागर कर दिया। यह खोज बताती है कि दिल्ली का इतिहास केवल भव्य स्मारकों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे-छोटे खंडहर भी शहर की परतदार कहानी का हिस्सा हैं।

रहस्यमयी कुएं का वीडियो नीचे देखें—

सराय जूलियाना की परतें उजागर करने वाले कोई और नहीं बल्कि एमसीडी की हेरिटेज सेल के सदस्य सचिव डॉ.अक़ील अहमद हैं।

डॉ.अक़ील ने रिसर्च के जरिए मोदी मिल फ्लाईओवर के पास पेड़ों से ढकी अठारहवीं शताब्दी के सराय जूलियाना के अवशेषों को सामने लाया है— आपको बता दें कि बीते ज़माने में सराय यात्रियों के लिए पानी और ठहरने का ठिकाना था। सराय नाम मुगल दरबार की प्रभावशाली पुर्तगाली महिला डोना जूलियाना डायस दा कोस्टा (Dona Juliana Dias da Costa) से जुड़ा है।

एमसीडी की हेरिटेज सेल के सदस्य सचिव डॉ.अक़ील अहमद के रिसर्च की ख़ास बातें—

  सराय जूलियाना, दिल्ली–आगरा की ऐतिहासिक सड़क पर स्थित यात्रियों का सराय था।

  डॉ.अक़ील ने 1807 और 1857 के नक्शों, ऐतिहासिक पुस्तकों और मौलवी ज़फ़र हसन व सर सैयद अहमद ख़ान जैसे इतिहासकारों के विवरणों का अध्ययन कर इसकी पहचान की।

  स्थल पर मौजूद हैं: एक पुराना कमरा, दीवारों और मेहराबों के अवशेष, लाखौरी ईंट की चिनाई और एक गोलाकार कुआँ जिसमें आज भी पानी है।

ऐसे हुई रिसर्च

ये अवशेष न तो साफ नजर आ रहे थे और न ही किसी सुलभ सार्वजनिक पार्क का हिस्सा थे।  रिसर्च नॉर्मल विजिट संभव नहीं थी। मैंने पुरानी दिल्ली–आगरा सड़क की तर्कसंगति तुलना उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक नक्शों से की, जिनमें 1807 और 1857 के नक्शे तथा अन्य उपलब्ध मानचित्र शामिल थे; मौलवी ज़फ़र हसन, सर सैयद अहमद ख़ान और अन्य इतिहासकारों द्वारा प्रकाशित सूचीपत्रों और विवरणों का अध्ययन किया; ‘सराय जूलैना’ नाम के अस्तित्व का अनुसरण किया; और बार-बार स्थल पर लौटकर दस्तावेज़ी संकेतों को भौतिक प्रमाणों से मिलाया।

डॉ.अक़ील अहमद

दिल्ली जैसे महानगर जहां चमकते स्मारक और टूरिस्ट प्लेस देशी-विदेशी पर्यटकों का ध्यान खींचते हैं, सराय जूलियाना जैसे खंडहर में तब्दील हो चुके ये सराय हमें याद दिलाती है कि इतिहास केवल भव्यता से नहीं, बल्कि यात्रियों की रोज़मर्रा की ज़रूरतों से भी बनता है। यह सराय उन कारवाँओं और यात्रियों का ठिकाना था जिनकी यात्रा पानी और आश्रय पर निर्भर थी।

डॉ. अक़ील का शोध यह भी उजागर करता है कि जूलियाना डायस दा कोस्टा (Dona Juliana Dias da Costa) केवल एक ईसाई महिला नहीं थीं, बल्कि चिकित्सक, शिक्षक, मध्यस्थ और राजनीतिक हस्ती थीं, जिन्होंने मुगल दरबार में अपनी जगह बनाई।

यह खोज एक चेतावनी भी है—अमान्यता प्राप्त धरोहर बेहद असुरक्षित है। एक बार दीवार गिरा दी जाए या कुआँ भर दिया जाए, तो इतिहास को केवल पट्टिका से पुनः जीवित नहीं किया जा सकता। रहस्यमयी कुएं का वीडियो सिर्फ यहां

–ख़बर यहीं तक

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