पब्लिक डोमेन में सॉफ्ट स्किल्स का ज्यादा महत्व होता है। लेकिन, अक्सर हम इसे इग्नोर करते हैं। समाज में रहना है तो समाज का आदमी बनना पड़ता है जैसे कुछ लोगों ने आपको खिलाने या पिलाने को कहा तो मुंह नहीं फेरना चाहिए। याद रखिए लाश ले जाने के लिए 4 लोग कंधे देते हैं और आत्मा को जाते किसी ने नहीं देखा। किसी से व्यवहार ये सोचकर ना करें कि उसका पद या संस्थान क्या है बल्कि ये देंखें उसमें क्षमता क्या है वो कैसा है. खासकर बुरे वक्त में उसने आपके साथ कैसा व्यवहार रखा। जिसने बुरे वक्त में साथ छोड़ा अच्छा वक्त जब आपका आगा तो वो पहला आदमी होगा जो काम निकालने आएगा।
जूनियर का सीनियर से और सीनियर का जूनियर से कंपीटिशन हमेशा रहेगा। लेकिन ध्यान रहे जूनियर हमेशा जूनियर नहीं रहता। जैसे आपका छोटा बच्चा कभी बड़ा भी तो होगा। जो आज कुछ नहीं कोई जरूरी नहीं वो हमेशा कुछ नहीं होगा। हर किसी को कभी न कभी किसी की जरूरत पड़ी है। भगवान राम ने तो बंदर और गिलहरी की मदद ली थी।
Nobody कभी भी somebody हो सकता है यानि आपसे जुनियर हो वो हमेशा इसमें नही रहेगा वो इसे चेंज भी कर सकता है। जुनियर भी कप्तान हो सकता है. किसी की मदद या नुकसान का असर सिर्फ उक्त तक सीमित नही रहता बल्कि इसका असर कई लोगो पर पड़ता है। कहां से कहां तक इसका असर होता है आप भी नही जानते। सोच समझकर मुह खोले, सोचसमझकर काम करे खासकर तब तब आप ताकतवर सिचुएशन में हो। हर व्यक्ति आप की मदद करने की स्थिति में नही होता है लेकिन आपको हर्ट करने की स्थिति में हमेशा होता है आपको नुकसान पहुंचाने के लिए आपका कुछ बिगाड़ने के लिए ताकत ही जरूरी।
–The End

